Tuesday, 14 October 2014

आरटीआई का पालन नहीं होने पर धरना

आरटीआई का पालन नहीं होने पर धरना
Oct 13, 2014, 06.30AM IST
एनबीटी, लखनऊ : सूचना का अधिकार अधिनियम के नौ वर्ष पूरे होने पर राजधानी
के कई संगठनों ने लक्ष्मण मेला मैदान में धरना दिया। धरने पर बैठे संगठन
के सदस्यों का कहना था कि राज्य सूचना आयोग समेत कई विभाग नियमों को ताख
पर रख आरटीआई कानून की अवहेलना करते हैं। कार्यक्रम के मीडिया प्रभारी
ज्ञानेश पांडेय ने कहा कि इस कार्यक्रम में सूचना आयुक्तों से डीबेट करने
की खुली छूट दी गई थी, लेकिन कार्यक्रम में कोई नहीं आया। उन्होंने कहा
कि सूचना आयोग में आज की तारीख में 55 हजार से ज्यादा मामले लम्बित हैं।
उसके बाद भी इन मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इस दौरान
येश्वर्याज सेवा संस्थान की ओर से यहां जनसुनवाई और जनजागरूकता कैंप भी
लगाया गया। इस धरने में काउंसलिंग ऑफ यूपी, ट्रैप संस्था अलीगढ, पीपल्स
फोरम, जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच, समाज सेवा संस्थान और भागीदारी मंच
के सदस्यों ने हिस्सा लिया। Navbharat Times

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-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838


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आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर धरना

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आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर धरना

Author: Satyamev India October 12, 2014
Uncategorized, उत्तर प्रदेश, एक्टिविस्ट न्यूज, देश, राज्य, समाचार
inShare
आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान
धरना स्थल पर पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक संस्था 'येश्वर्याज
सेवा संस्थान' द्वारा जनसुनवाई और जनजागरूकता कैंप का आयोजन किया गया तो
वही लोक जीवन में पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के
मानवाधिकारों के संरक्षण के हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर
कार्यशील संस्था 'तहरीर' द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में धरना और यूपी के हालिया कार्यरत 9 सूचना
आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनको कैमरे के सामने एक्ट पर खुली
बहस की आरटीआई विशेषज्ञ ई० संजय शर्मा द्वारा दी गयी चुनौती के कार्यक्रम
का आयोजन एक्शन ग्रुप फॉर राइट टु इनफार्मेशन , आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़ यूपी ,
ट्रैप संस्था अलीगढ , सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, पीपल्स फोरम,
मानव विकास सेवा समिति मुरादाबाद , जन सूचना अधिकार जागरूकता
मंच,भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच , एसआरपीडी मेमोरियल समाज सेवा संस्थान
, आल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर
एसोसिएशन, भागीदारी मंच, सार्वजनिक जबाबदेही भारत निर्माण मंच आदि
संगठनों के साथ संयुक्त रूप से किया गया l कार्यक्रम की अध्यक्षता तहरीर
संस्था के संस्थापक और अध्यक्ष ईo संजय शर्मा ने की l संजय शर्मा की
गिनती देश के मूर्धन्य आरटीआई विशेषज्ञों में होती है और उत्तर प्रदेश
में आरटीआई के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का लोहा प्रदेश के सभी आरटीआई
कार्यकर्ता मानते हैं lकार्यक्रम में प्रतिभागी संगठनों के प्रतिनिधियों
के साथ साथ उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने
प्रतिभाग किया l कैंप में आरटीआई विशेषज्ञों ने लोगों को आरटीआई के
जनोपयोगी प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया तो वही जनसुनवाई में
जनसूचना अधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी और सूचना आयोग की आरटीआई एक्ट के
क्रियान्वयन के प्रति उदासीनता से व्यथित लोगों ने अपनी समस्याएं आरटीआई
विशेषज्ञों के साथ साझा कर समस्याओ के समाधान के सम्बन्ध में मार्गदर्शन
प्राप्त किया l संयुक्त कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने अपनी मांगों के
सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को सम्बोधित एक मांगपत्र
हस्ताक्षरित कर प्रेषित किया l कार्यक्रम में कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स
इनिशिएटिव नई दिल्ली की ओर से येश्वर्याज को निःशुल्क उपलब्ध कराई गयी
आरटीआई गाइड का भी निःशुल्क वितरण किया गया l
इस सम्बन्ध में बात करते हुए संजय शर्मा ने बताया कि लोक जीवन में
पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के
संरक्षण के हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील संस्था
'तहरीर' को प्राप्त प्रमाणों के आधार पर उन्हें यह कहने में कोई गुरेज
नहीं है कि सूचना आयुक्तों की अक्षमता के कारण ही आरटीआई के तहत सूचना
दिलाने बाली संस्था सूचना आयोग ही आज सूचना दिलाने के मार्ग की सबसे बड़ी
वाधा बन गयी है l संजय ने कहा कि इन सूचना आयुक्तों की पोल-पट्टी खोलकर
इनकी हकीकत संसार के सामने लाने के लिए ही उन्होंने यूपी के हालिया
कार्यरत 9 सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनको कैमरे के
सामने एक्ट पर खुली बहस की चुनौती दी है और कहा कि इन आयुक्तों से हार
जाने की दशा में उन्होंने इन आयुक्तों द्वारा मुक़र्रर सजाये मौत तक की हर
सजा को स्वीकारने का वादा भी किया है l संजय ने बताया कि चुनौती के
सम्बन्ध में उन्होंने राज्य सूचना आयोग को 2 ई-मेल दिनांक 09-10-14 और
10-10-14 को प्रेषित करने के साथ साथ उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग
के सचिव के कार्यालय में दिनांक 10-10-14 को एक तीन पेज का चुनौती पत्र
व्यक्तिगत रूप से आयोग जाकर भी प्राप्त करा दिया है l संजय ने बताया कि
उनके आंकलन के अनुसार उत्तर प्रदेश के वर्तमान सूचना आयुक्तों में से कोई
भी सूचना आयुक्त पद के लिए निर्धारित योग्यताओं में से 10% भी योग्यता
धारित नहीं करते है l संजय बताते हैं कि प्रदेश के सूचना आयुक्त का पद
मुख्य सचिव के समकक्ष है और एक सवाल उठाते हैं कि क्या यह माना जा सकता
है कि जिस कार्यालय में योग्यतानुसार नियुक्त 9 मुख्य सचिव कार्यरत हों
वहां ऐसी भयंकर बदहाली व्याप्त हो जबकि मात्र 1 मुख्य सचिव पूरा सूबा
संभालता है ? इस सबाल का जबाब देते हुए संजय कहते हैं कि ऐसा इसलिए है
क्योंकि वर्तमान में नियुक्त सभी सूचना आयुक्त नितांत अयोग्य हैं और वे
मात्र अपने राजनैतिक संबंधों के चलते ही यह महत्वपूर्ण पद पा गए हैं l
बौद्धिक असम्बेदनशीलता , अक्षमता और अपने राजनैतिक आकाओं के दबाब के चलते
ही वे अपने पद की गरिमा के अनुकूल कार्य नहीं कर पा रहे हैं और इस उच्च
पद को कलंकित कर रहे हैं l
आरटीआई विशेषज्ञ संजय शर्मा ने बताया कि उनकी खुली बहस की चुनौती पर आज
यूपी का कोई भी सूचना आयुक्तसामने नहीं आया l संजय ने अब अयोग्य सूचना
आयुक्तों की नियुक्तियां रद्द कराने को उच्च न्यायालय में याचिका दायर
करने का निर्णय लिया है l
आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश सूचना आयोग स्वयं
ही आरटीआई एक्ट का विनाश करने में लगा है l उर्वशी ने कहा कि यह
दुर्भाग्यपूर्ण है कि नौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के बाबजूद आयोग में
55000 से अधिक वाद लंबित हैं जो पूरे देश के सभी सूचना आयोगों में
सर्वाधिक हैं l नौ सालों में आयोग की नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है और
आयोग का हर कार्मिक मनमाने रूप से स्व घोषित नियमों के अनुसार कार्य कर
रहा है जिसके कारण उत्तर प्रदेश में लागू होने के 9 वर्षों में ही सूचना
का अधिकार लगभग मृतप्राय हो चुका है l
यूपी के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ लामबंद हुए संगठनों ने एक सुर से
सूचना आयुक्तों द्वारा आयुक्त पद ग्रहण करने के बाद से अब तक की अवधि में
चल-अचल सम्पत्तियों में किये गए निवेशों को सार्वजनिक कराने, यूपी के
अक्षम सूचना आयुक्तों को तत्काल निलंबित कर के उनके अब तक के कार्यों की
विधिक समीक्षा कराकर इनके विरुद्ध कार्यवाही कराने , सूचना आयुक्तों के
रिक्त पदों पर पद की योग्यतानुसार पारदर्शी प्रक्रिया से सूचना आयुक्तों
की नियुक्ति कराने , 55000 से अधिक लम्वित वादों की विशेष सुनवाईयां
शनिवार और रविवार के अवकाश के दिनों में कराने, आयोग की नियमावली तत्काल
लागू कराने,आयोग में नयी अपीलों और शिकायतों के प्राप्त होने के 1 सप्ताह
के अंदर प्रथम सुनवाई कराने, आदेशों की नक़ल आदेश होने के 1 सप्ताह के
अंदर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कराने, सूचना आयोग में रिश्वत मांगे जाने
की शिकायतें करने के लिए एक सतर्कता अधिकारी नियुक्त कराने , अपीलों और
शिकायतों की सुनवाई की अगली तारीखें अधिकतम 30 दिन बाद की देने,सूचना
आयुक्तों और नागरिकों/ आरटीआई कार्यकर्ताओं के पारस्परिक संवाद की
प्रणाली विकसित करके प्रतिमाह एक बैठक कराने, आरटीआई कार्यकर्ताओं को
जनहित के लिए सूचना मांगने को प्रेरित करने का तंत्र विकसित कराने ,
सूचना आयोग में वादियों के मानवाधिकारों को संरक्षित रखने हेतु उनको खड़ा
कर के सुनवाई करने के स्थान पर कुर्सी पर बैठाकर सुनवाई कराने , वादियों
को झूठे मामलों में फसाए जाने की स्थिति में अपना समुचित वचाव करने के
लिए वादी द्वारा मांगे जाने पर आयोग की सीसीटीवी फुटेज तत्काल उपलब्ध
कराने, आयुक्तों द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की सुविधानुसार
बदलने की प्रवृत्ति रोकने के लिए आयुक्त के स्टेनो की शॉर्टहैंड बुक पर
पेंसिल के स्थान पर पेन से लिखना अनिवार्य करने तथा शॉर्टहैंड बुक पर
उपस्थित वादी और प्रतिवादी के हस्ताक्षर कराने , आयुक्तों द्वारा
दण्डादेशों को बापस लेने के असंवैधानिक कारनामों पर तत्काल रोक लगाने,
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के तहत तत्काल समिति बनाकर इस
समिति द्वारा अब तक सूचना आयुक्तों के विरुद्ध महिलाओं द्वारा की गयी
उत्पीड़न की शिकायतों की तत्काल जांच कराने, आयोग के कार्यालयीन कार्यों
की लिखित प्रक्रिया बनाये जाने, आयोग के द्वारा सम्पादित कार्यों की
मासिक रिपोर्ट तैयार कराकर स्वतः ही सार्वजनिक कराने आदि मांगों के साथ
धरना देते हुए राज्यपाल को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया l
कार्यक्रम का समापन करते हुए येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी
शर्मा ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए 3 माह में उनकी
मांगें न माने जाने पर प्रदेश के अन्य सभी संगठनों को साथ लेकर सूचना
आयोग और प्रदेश सरकार के खिलाफ वृहद स्तर पर उग्र आंदोलन करने को तैयार
रहने का आव्हान किया l

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आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर धरना

http://www.newstodaytime.com/2014/10/blog-post_84.html

आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर धरना
Written By Bureau News on Monday, October 13, 2014 | 2:33 PM
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लखनऊ।। आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला
मैदान धरना स्थल पर पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक संस्था
'येश्वर्याज सेवा संस्थान' द्वारा जनसुनवाई और जनजागरूकता कैंप का आयोजन
किया गया तो वही लोक जीवन में पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और
आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर
पर कार्यशील संस्था 'तहरीर' द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में धरना और यूपी के हालिया कार्यरत 9 सूचना
आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनको कैमरे के सामने एक्ट पर खुली
बहस की आरटीआई विशेषज्ञ ई० संजय शर्मा द्वारा दी गयी चुनौती के कार्यक्रम
का आयोजन एक्शन ग्रुप फॉर राइट टु इनफार्मेशन, आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़ यूपी,
ट्रैप संस्था अलीगढ, सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, पीपल्स फोरम,
मानव विकास सेवा समिति मुरादाबाद, जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच,
भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच, एसआरपीडी मेमोरियल समाज सेवा संस्थान, आल
इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर
एसोसिएशन, भागीदारी मंच, सार्वजनिक जबाबदेही भारत निर्माण मंच आदि
संगठनों के साथ संयुक्त रूप से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता तहरीर
संस्था के संस्थापक और अध्यक्ष ईo संजय शर्मा ने की। संजय शर्मा की गिनती
देश के मूर्धन्य आरटीआई विशेषज्ञों में होती है और उत्तर प्रदेश में
आरटीआई के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का लोहा प्रदेश के सभी आरटीआई
कार्यकर्ता मानते हैं। कार्यक्रम में प्रतिभागी संगठनों के प्रतिनिधियों
के साथ साथ उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने
प्रतिभाग किया l कैंप में आरटीआई विशेषज्ञों ने लोगों को आरटीआई के
जनोपयोगी प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया तो वही जनसुनवाई में
जनसूचना अधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी और सूचना आयोग की आरटीआई एक्ट के
क्रियान्वयन के प्रति उदासीनता से व्यथित लोगों ने अपनी समस्याएं आरटीआई
विशेषज्ञों के साथ साझा कर समस्याओ के समाधान के सम्बन्ध में मार्गदर्शन
प्राप्त किया। संयुक्त कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने अपनी मांगों के
सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को सम्बोधित एक मांगपत्र
हस्ताक्षरित कर प्रेषित किया l कार्यक्रम में कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स
इनिशिएटिव नई दिल्ली की ओर से येश्वर्याज को निःशुल्क उपलब्ध कराई गयी
आरटीआई गाइड का भी निःशुल्क वितरण किया गया।
इस सम्बन्ध में बात करते हुए संजय शर्मा ने बताया कि लोक जीवन में
पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के
संरक्षण के हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील संस्था
'तहरीर' को प्राप्त प्रमाणों के आधार पर उन्हें यह कहने में कोई गुरेज
नहीं है कि सूचना आयुक्तों की अक्षमता के कारण ही आरटीआई के तहत सूचना
दिलाने बाली संस्था सूचना आयोग ही आज सूचना दिलाने के मार्ग की सबसे बड़ी
वाधा बन गयी है। संजय ने कहा कि इन सूचना आयुक्तों की पोल-पट्टी खोलकर
इनकी हकीकत संसार के सामने लाने के लिए ही उन्होंने यूपी के हालिया
कार्यरत 9 सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनको कैमरे के
सामने एक्ट पर खुली बहस की चुनौती दी है और कहा कि इन आयुक्तों से हार
जाने की दशा में उन्होंने इन आयुक्तों द्वारा मुक़र्रर सजाये मौत तक की हर
सजा को स्वीकारने का वादा भी किया है l संजय ने बताया कि चुनौती के
सम्बन्ध में उन्होंने राज्य सूचना आयोग को 2 ई-मेल दिनांक 09-10-14 और
10-10-14 को प्रेषित करने के साथ साथ उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग
के सचिव के कार्यालय में दिनांक 10-10-14 को एक तीन पेज का चुनौती पत्र
व्यक्तिगत रूप से आयोग जाकर भी प्राप्त करा दिया है। संजय ने बताया कि
उनके आंकलन के अनुसार उत्तर प्रदेश के वर्तमान सूचना आयुक्तों में से कोई
भी सूचना आयुक्त पद के लिए निर्धारित योग्यताओं में से 10% भी योग्यता
धारित नहीं करते है। संजय बताते हैं कि प्रदेश के सूचना आयुक्त का पद
मुख्य सचिव के समकक्ष है और एक सवाल उठाते हैं कि क्या यह माना जा सकता
है कि जिस कार्यालय में योग्यतानुसार नियुक्त 9 मुख्य सचिव कार्यरत हों
वहां ऐसी भयंकर बदहाली व्याप्त हो जबकि मात्र 1 मुख्य सचिव पूरा सूबा
संभालता है ? इस सबाल का जबाब देते हुए संजय कहते हैं कि ऐसा इसलिए है
क्योंकि वर्तमान में नियुक्त सभी सूचना आयुक्त नितांत अयोग्य हैं और वे
मात्र अपने राजनैतिक संबंधों के चलते ही यह महत्वपूर्ण पद पा गए हैं।
बौद्धिक असम्बेदनशीलता , अक्षमता और अपने राजनैतिक आकाओं के दबाब के चलते
ही वे अपने पद की गरिमा के अनुकूल कार्य नहीं कर पा रहे हैं और इस उच्च
पद को कलंकित कर रहे हैं।
आरटीआई विशेषज्ञ संजय शर्मा ने बताया कि उनकी खुली बहस की चुनौती पर
आज यूपी का कोई भी सूचना आयुक्तसामने नहीं आया। संजय ने अब अयोग्य सूचना
आयुक्तों की नियुक्तियां रद्द कराने को उच्च न्यायालय में याचिका दायर
करने का निर्णय लिया है।
आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश सूचना आयोग
स्वयं ही आरटीआई एक्ट का विनाश करने में लगा है। उर्वशी ने कहा कि यह
दुर्भाग्यपूर्ण है कि नौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के बाबजूद आयोग में
55000 से अधिक वाद लंबित हैं जो पूरे देश के सभी सूचना आयोगों में
सर्वाधिक हैं। नौ सालों में आयोग की नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है और
आयोग का हर कार्मिक मनमाने रूप से स्व घोषित नियमों के अनुसार कार्य कर
रहा है जिसके कारण उत्तर प्रदेश में लागू होने के 9 वर्षों में ही सूचना
का अधिकार लगभग मृतप्राय हो चुका है।
यूपी के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ लामबंद हुए संगठनों ने एक सुर से
सूचना आयुक्तों द्वारा आयुक्त पद ग्रहण करने के बाद से अब तक की अवधि में
चल-अचल सम्पत्तियों में किये गए निवेशों को सार्वजनिक कराने, यूपी के
अक्षम सूचना आयुक्तों को तत्काल निलंबित कर के उनके अब तक के कार्यों की
विधिक समीक्षा कराकर इनके विरुद्ध कार्यवाही कराने, सूचना आयुक्तों के
रिक्त पदों पर पद की योग्यतानुसार पारदर्शी प्रक्रिया से सूचना आयुक्तों
की नियुक्ति कराने, 55000 से अधिक लम्वित वादों की विशेष सुनवाईयां
शनिवार और रविवार के अवकाश के दिनों में कराने, आयोग की नियमावली तत्काल
लागू कराने,आयोग में नयी अपीलों और शिकायतों के प्राप्त होने के 1 सप्ताह
के अंदर प्रथम सुनवाई कराने, आदेशों की नक़ल आदेश होने के 1 सप्ताह के
अंदर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कराने, सूचना आयोग में रिश्वत मांगे जाने
की शिकायतें करने के लिए एक सतर्कता अधिकारी नियुक्त कराने, अपीलों और
शिकायतों की सुनवाई की अगली तारीखें अधिकतम 30 दिन बाद की देने,सूचना
आयुक्तों और नागरिकों/आरटीआई कार्यकर्ताओं के पारस्परिक संवाद की प्रणाली
विकसित करके प्रतिमाह एक बैठक कराने, आरटीआई कार्यकर्ताओं को जनहित के
लिए सूचना मांगने को प्रेरित करने का तंत्र विकसित कराने, सूचना आयोग में
वादियों के मानवाधिकारों को संरक्षित रखने हेतु उनको खड़ा कर के सुनवाई
करने के स्थान पर कुर्सी पर बैठाकर सुनवाई कराने, वादियों को झूठे मामलों
में फसाए जाने की स्थिति में अपना समुचित वचाव करने के लिए वादी द्वारा
मांगे जाने पर आयोग की सीसीटीवी फुटेज तत्काल उपलब्ध कराने, आयुक्तों
द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की सुविधानुसार बदलने की प्रवृत्ति
रोकने के लिए आयुक्त के स्टेनो की शॉर्टहैंड बुक पर पेंसिल के स्थान पर
पेन से लिखना अनिवार्य करने तथा शॉर्टहैंड बुक पर उपस्थित वादी और
प्रतिवादी के हस्ताक्षर कराने , आयुक्तों द्वारा दण्डादेशों को बापस लेने
के असंवैधानिक कारनामों पर तत्काल रोक लगाने, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न
रोकथाम कानून के तहत तत्काल समिति बनाकर इस समिति द्वारा अब तक सूचना
आयुक्तों के विरुद्ध महिलाओं द्वारा की गयी उत्पीड़न की शिकायतों की
तत्काल जांच कराने, आयोग के कार्यालयीन कार्यों की लिखित प्रक्रिया बनाये
जाने, आयोग के द्वारा सम्पादित कार्यों की मासिक रिपोर्ट तैयार कराकर
स्वतः ही सार्वजनिक कराने आदि मांगों के साथ धरना देते हुए राज्यपाल को
एक ज्ञापन भी प्रेषित किया।
कार्यक्रम का समापन करते हुए येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी
शर्मा ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए 3 माह में उनकी
मांगें न माने जाने पर प्रदेश के अन्य सभी संगठनों को साथ लेकर सूचना
आयोग और प्रदेश सरकार के खिलाफ वृहद स्तर पर उग्र आंदोलन करने को तैयार
रहने का आव्हान किया।


--
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101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
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सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई विशेषज्ञ और ‘तहरीर’ के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा ने वर्तमान सूचना आयुक्तों से एक साथ या अकेले-अकेले खुली बहस करने की चुनौती दी

दस साल में निकला दम
फरजंद अहमद, पूर्व सूचना आयुक्त, बिहार
First Published:12-10-14 09:10 PM
Last Updated:12-10-14 09:10 PM
http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/guestcolumn/article1-Well-known-British-poet-scholar-Richard-Garnet-50-62-456122.html

जाने-माने ब्रिटिश कवि और स्कॉलर रिचर्ड गारनेट ने एक बार कहा था कि हर
परदे की ख्वाहिश होती है कि कोई उसे बेपरदा करे, सिवाय पाखंड के परदे का।
पाखंड का परदा व्यवस्था के चेहरे से उठे या न उठे, मगर सूचना के अधिकार
का इस्तेमाल करने वालों के बीच फैलता खौफ और सरकारी कामकाज में
पारदर्शिता की गारंटी देने वाला सूचना अधिकार कानून खुद पाखंड के परदे के
भीतर दम तोड़ रहा है। आज आरटीआई की दसवीं वर्षगांठ है, मगर पहली बार
केंद्रीय सूचना आयोग में न तो कोई शिकवा-शिकायत करने वाला होगा और न ही
सूचना का अधिकार, यानी सनशाइन कानून पर मंडराते स्याह बादलों पर कोई
चर्चा होगी। केवल बंद कमरे में एक औपचारिकता पूरी की जाएगी, क्योंकि
केंद्रीय सूचना आयोग में फिलहाल कोई मुख्य सूचना आयुक्त नहीं। पहले
राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करते थे और सरकार की नजर में इस
कानून की कमजोरियों या उपलब्धि पर बहस की शुरुआत करते थे, लेकिन नई सरकार
को इतनी फुरसत नहीं मिली कि वह मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त कर सके।

जो कानून अब तक जनता के हाथ में एक धारदार हथियार था, प्रजातंत्र के लिए
ऑक्सीजन था, उस हथियार की धार दस वर्षों में ही कुंद हो चुकी है। सरकारें
या प्रशासन हर आवेदक को शक की नजरों से देखते हैं, इसलिए लोक सूचना
पदाधिकारी सूचना देने से कतराते हैं या फिर उन्हें दौड़ाते रहते हैं।
नतीजा यह है कि वादों का अंबार आकाश छू रहा है। आवेदक अपनी अपील लेकर
आयोग का चक्कर काटते-काटते थकते जा रहे हैं। युवा सामाजिक कार्यकर्ता
उत्कर्ष सिन्हा को लगता है कि अब हर आवेदक राग दरबारी का बेबस लंगड़
बनकर रह जाएगा, जिसने पूरी जिंदगी एक दस्तावेज की नकल के लिए गंवा दी थी।
आरटीआई असेसमेंट और एडवोकेसी ग्रुप और समय-सेंटर फॉर इक्विटीज के अनुसार,
आज सूचना आयोगों में करीब दो लाख वाद सुनवाई के लिए तरस रहे हैं। अध्ययन
के अनुसार, मध्य प्रदेश में यदि आज कोई अपील दाखिल करता है, तो 60 साल
बाद उसका नंबर आएगा। वहीं पश्चिम बंगाल में उसे 17 साल, राजस्थान में तीन
साल, असम और केरल में दो साल इंतजार करना होगा। खुद केंद्रीय सूचना आयोग
में 26,115 मामले लंबित हैं।

अध्ययन के अनुसार, सबसे अधिक मामले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में
लंबित हैं। इनकी संख्या 48,442 है, जबकि महाराष्ट्र सूचना मांगने वालों
की हत्या और उत्पीड़न में पूरे देश में अव्वल नंबर पर है। कॉमनवेल्थ
ह्यूमन राइट इनीशिएटिव के अनुसार, महाराष्ट्र में अब तक 53 आवेदकों पर
जानलेवा हमले हो चुके हैं, जिनमें नौ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि
बिहार में छह लोग सूचना मांगने के कारण मारे गए हैं। जाने-माने आरटीआई
एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय (जिन्होंने सूचना मांगने के कारण झूठे मामले
में कई महीने जेल में गुजारे थे) के अनुसार, बिहार में आवेदकों पर अब
हमले कुछ कम इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि दहशत के कारण लोग सूचना मांगने के
पहले कई बार सोचते हैं। महाराष्ट्र के बाद गुजरात का नंबर आता है, जहां
34 कार्यकर्ताओं पर हमले हो चुके हैं। उनमें से तीन मारे जा चुके हैं।

मगर उत्तर प्रदेश में सूचना की बदहाली नई मिसाल कायम कर रही है। यहां
फिलहाल नौ सूचना आयुक्त हैं, जिनकी काबिलियत और उदासीनता पर चर्चा चल रही
है। अन्य संस्थानों के साथ-साथ एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी
शर्मा ने यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए नौ
आयुक्तों को खुली बहस की चुनौती दी है। सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई
विशेषज्ञ और 'तहरीर' के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा ने भी वर्तमान सूचना
आयुक्तों से एक साथ अकेले या खुली बहस करने की चुनौती दी है। पिछले तीन
वर्षों से केंद्र सरकार सूचना का अधिकार कानून को नई ताकत देने के नाम पर
इसे कमजोर करने का काम कर रही थी। साल 2011 में केंद्रीय सूचना आयोग ने
तत्कालीन राष्ट्रपति (प्रतिभा पाटिल) को अपनी संपत्ति का ब्योरा देने का
आदेश दिया था। उन्हीं दिनों 2-जी स्पेक्ट्रम के संबंध में तत्कालीन वित्त
मंत्री प्रणब मुखर्जी (अब राष्ट्रपति) की फाइल टिप्पणी को सरेआम करना
पड़ा था। फिर रॉबर्ट वाड्रा की लैंड डील का मामला आरटीआई के माध्यम से
उछला।

इन सबका असर सरकार पर दिखाई पड़ा। 15 अक्तूबर, 2011 को केंद्रीय सूचना
आयोग के सालाना सम्मलेन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था
कि अब हमें सूचना के अधिकार कानून पर आलोचनात्मक रुख अपनाना होगा..,
आरटीआई का सरकारी विचार-विमर्श की प्रक्रिया पर उल्टा असर नहीं पड़ना
चाहिए। फिर अगले साल 12 अक्तूबर, 2012 को मनमोहन सिंह ने कहा कि निजता का
उल्लंघन करने वाली बेहूदा और परेशान करने वाली आरटीआई आवेदनों को लेकर
चिंता पैदा हो रही है। ठीक इसके बाद ही खबर आई थी कि केंद्र सरकार ने यह
फैसला किया है कि वह एक समिति गठित कर यह पता लगाएगी कि सूचना एकत्र करने
और देने पर सरकार का कितना खर्च आता है।

इस तरह की बात सूचना के अधिकार अधिनियम की आत्मा के खिलाफ है, क्योंकि इस
कानून की धारा 7(3) साफ तौर पर कहती कि सूचना की कॉपी पर खर्च आवेदक को
ही वहन करना होगा। साफ है कि दस साल के भीतर ही इसे कमजोर करने की कवायद
शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के कई
फैसलों ने आवेदकों के बीच खलबली मचा दी थी। दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने
एक फैसला सुनाया था कि हर सूचना आयोग दो-आयुक्तों का पीठ होगा, जिसमें एक
हाई कोर्ट के जज होंगे। मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर कोई जज ही होगा। इस
आदेश के बाद कई राज्य आयोग का कामकाज बंद हो गया। बाद में खुद सुप्रीम
कोर्ट ने इस फैसले को 'मिस्टेक ऑफ लॉ' कहकर वापस ले लिया। बिहार सहित कई
राज्यों में धारा 20 के तहत लगाए गए दंड की सही तरीके से वसूली नहीं
होती, जिसके कारण लोक सूचना पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है और
आवेदक भटक रहे हैं। आज दुनिया के लगभग 100 देशों में सूचना का अधिकार
कानून लागू है। दक्षिण एशिया में भारत का कानून सबसे कारगर था, क्योंकि
खुद कार्यकर्ताओं ने इसकी रचना की थी और केंद्र सरकार ने भी इसे लागू
करने में खासी दिलचस्पी दिखाई थी। मगर अब जब सूचना का अधिकार कानून खुद
सरकारों के गले की हड्डी बन चुका है, तब कौन बचाए इसे?
(ये लेखक के अपने विचार हैं)


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
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उत्तर प्रदेश में सूचना की बदहाली नई मिसाल कायम कर रही है। यहां फिलहाल नौ सूचना आयुक्त हैं, जिनकी काबिलियत और उदासीनता पर चर्चा चल रही है। अन्य संस्थानों के साथ-साथ एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा ने यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए नौ आयुक्तों को खुली बहस की चुनौती दी है। सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई विशेषज्ञ और ‘तहरीर’ के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा ने भी वर्तमान सूचना आयुक्तों से एक साथ अकेले या खुली बहस करने की चुनौती दी है।

दस साल में निकला दम
http://www.livehindustan.com/news/lifestyle/guestcolumn/article1-Well-known-British-poet-scholar-Richard-Garnet-50-62-456122.html
फरजंद अहमद, पूर्व सूचना आयुक्त, बिहार
First Published:12-10-14 09:10 PM
Last Updated:12-10-14 09:10 PM
जाने-माने ब्रिटिश कवि और स्कॉलर रिचर्ड गारनेट ने एक बार कहा था कि हर
परदे की ख्वाहिश होती है कि कोई उसे बेपरदा करे, सिवाय पाखंड के परदे का।
पाखंड का परदा व्यवस्था के चेहरे से उठे या न उठे, मगर सूचना के अधिकार
का इस्तेमाल करने वालों के बीच फैलता खौफ और सरकारी कामकाज में
पारदर्शिता की गारंटी देने वाला सूचना अधिकार कानून खुद पाखंड के परदे के
भीतर दम तोड़ रहा है। आज आरटीआई की दसवीं वर्षगांठ है, मगर पहली बार
केंद्रीय सूचना आयोग में न तो कोई शिकवा-शिकायत करने वाला होगा और न ही
सूचना का अधिकार, यानी सनशाइन कानून पर मंडराते स्याह बादलों पर कोई
चर्चा होगी। केवल बंद कमरे में एक औपचारिकता पूरी की जाएगी, क्योंकि
केंद्रीय सूचना आयोग में फिलहाल कोई मुख्य सूचना आयुक्त नहीं। पहले
राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन करते थे और सरकार की नजर में इस
कानून की कमजोरियों या उपलब्धि पर बहस की शुरुआत करते थे, लेकिन नई सरकार
को इतनी फुरसत नहीं मिली कि वह मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त कर सके।

जो कानून अब तक जनता के हाथ में एक धारदार हथियार था, प्रजातंत्र के लिए
ऑक्सीजन था, उस हथियार की धार दस वर्षों में ही कुंद हो चुकी है। सरकारें
या प्रशासन हर आवेदक को शक की नजरों से देखते हैं, इसलिए लोक सूचना
पदाधिकारी सूचना देने से कतराते हैं या फिर उन्हें दौड़ाते रहते हैं।
नतीजा यह है कि वादों का अंबार आकाश छू रहा है। आवेदक अपनी अपील लेकर
आयोग का चक्कर काटते-काटते थकते जा रहे हैं। युवा सामाजिक कार्यकर्ता
उत्कर्ष सिन्हा को लगता है कि अब हर आवेदक राग दरबारी का बेबस लंगड़
बनकर रह जाएगा, जिसने पूरी जिंदगी एक दस्तावेज की नकल के लिए गंवा दी थी।
आरटीआई असेसमेंट और एडवोकेसी ग्रुप और समय-सेंटर फॉर इक्विटीज के अनुसार,
आज सूचना आयोगों में करीब दो लाख वाद सुनवाई के लिए तरस रहे हैं। अध्ययन
के अनुसार, मध्य प्रदेश में यदि आज कोई अपील दाखिल करता है, तो 60 साल
बाद उसका नंबर आएगा। वहीं पश्चिम बंगाल में उसे 17 साल, राजस्थान में तीन
साल, असम और केरल में दो साल इंतजार करना होगा। खुद केंद्रीय सूचना आयोग
में 26,115 मामले लंबित हैं।

अध्ययन के अनुसार, सबसे अधिक मामले सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में
लंबित हैं। इनकी संख्या 48,442 है, जबकि महाराष्ट्र सूचना मांगने वालों
की हत्या और उत्पीड़न में पूरे देश में अव्वल नंबर पर है। कॉमनवेल्थ
ह्यूमन राइट इनीशिएटिव के अनुसार, महाराष्ट्र में अब तक 53 आवेदकों पर
जानलेवा हमले हो चुके हैं, जिनमें नौ लोगों की जान जा चुकी है, जबकि
बिहार में छह लोग सूचना मांगने के कारण मारे गए हैं। जाने-माने आरटीआई
एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय (जिन्होंने सूचना मांगने के कारण झूठे मामले
में कई महीने जेल में गुजारे थे) के अनुसार, बिहार में आवेदकों पर अब
हमले कुछ कम इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि दहशत के कारण लोग सूचना मांगने के
पहले कई बार सोचते हैं। महाराष्ट्र के बाद गुजरात का नंबर आता है, जहां
34 कार्यकर्ताओं पर हमले हो चुके हैं। उनमें से तीन मारे जा चुके हैं।

मगर उत्तर प्रदेश में सूचना की बदहाली नई मिसाल कायम कर रही है। यहां
फिलहाल नौ सूचना आयुक्त हैं, जिनकी काबिलियत और उदासीनता पर चर्चा चल रही
है। अन्य संस्थानों के साथ-साथ एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी
शर्मा ने यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए नौ
आयुक्तों को खुली बहस की चुनौती दी है। सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई
विशेषज्ञ और 'तहरीर' के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा ने भी वर्तमान सूचना
आयुक्तों से एक साथ अकेले या खुली बहस करने की चुनौती दी है। पिछले तीन
वर्षों से केंद्र सरकार सूचना का अधिकार कानून को नई ताकत देने के नाम पर
इसे कमजोर करने का काम कर रही थी। साल 2011 में केंद्रीय सूचना आयोग ने
तत्कालीन राष्ट्रपति (प्रतिभा पाटिल) को अपनी संपत्ति का ब्योरा देने का
आदेश दिया था। उन्हीं दिनों 2-जी स्पेक्ट्रम के संबंध में तत्कालीन वित्त
मंत्री प्रणब मुखर्जी (अब राष्ट्रपति) की फाइल टिप्पणी को सरेआम करना
पड़ा था। फिर रॉबर्ट वाड्रा की लैंड डील का मामला आरटीआई के माध्यम से
उछला।

इन सबका असर सरकार पर दिखाई पड़ा। 15 अक्तूबर, 2011 को केंद्रीय सूचना
आयोग के सालाना सम्मलेन में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था
कि अब हमें सूचना के अधिकार कानून पर आलोचनात्मक रुख अपनाना होगा..,
आरटीआई का सरकारी विचार-विमर्श की प्रक्रिया पर उल्टा असर नहीं पड़ना
चाहिए। फिर अगले साल 12 अक्तूबर, 2012 को मनमोहन सिंह ने कहा कि निजता का
उल्लंघन करने वाली बेहूदा और परेशान करने वाली आरटीआई आवेदनों को लेकर
चिंता पैदा हो रही है। ठीक इसके बाद ही खबर आई थी कि केंद्र सरकार ने यह
फैसला किया है कि वह एक समिति गठित कर यह पता लगाएगी कि सूचना एकत्र करने
और देने पर सरकार का कितना खर्च आता है।

इस तरह की बात सूचना के अधिकार अधिनियम की आत्मा के खिलाफ है, क्योंकि इस
कानून की धारा 7(3) साफ तौर पर कहती कि सूचना की कॉपी पर खर्च आवेदक को
ही वहन करना होगा। साफ है कि दस साल के भीतर ही इसे कमजोर करने की कवायद
शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के कई
फैसलों ने आवेदकों के बीच खलबली मचा दी थी। दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने
एक फैसला सुनाया था कि हर सूचना आयोग दो-आयुक्तों का पीठ होगा, जिसमें एक
हाई कोर्ट के जज होंगे। मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर कोई जज ही होगा। इस
आदेश के बाद कई राज्य आयोग का कामकाज बंद हो गया। बाद में खुद सुप्रीम
कोर्ट ने इस फैसले को 'मिस्टेक ऑफ लॉ' कहकर वापस ले लिया। बिहार सहित कई
राज्यों में धारा 20 के तहत लगाए गए दंड की सही तरीके से वसूली नहीं
होती, जिसके कारण लोक सूचना पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है और
आवेदक भटक रहे हैं। आज दुनिया के लगभग 100 देशों में सूचना का अधिकार
कानून लागू है। दक्षिण एशिया में भारत का कानून सबसे कारगर था, क्योंकि
खुद कार्यकर्ताओं ने इसकी रचना की थी और केंद्र सरकार ने भी इसे लागू
करने में खासी दिलचस्पी दिखाई थी। मगर अब जब सूचना का अधिकार कानून खुद
सरकारों के गले की हड्डी बन चुका है, तब कौन बचाए इसे?

Sunday, 12 October 2014

आरटीआई विशेषज्ञ संजय की चुनौती पर सामने नहीं आया यूपी का कोई सूचना आयुक्त! अब अयोग्य सूचना आयुक्तों की नियुक्तियां रद्द कराने को उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे संजय l None of 9 info commissioners dared to accept RTI Expert Er. Sanjay Sharma's Challenge. "Shall adopt High Court Route to get the appointments of all 9 incapable info-commissioners of Uttar Pradesh nullified" asserts Sanjay.

प्रेस विज्ञप्ति ( प्रकाशनार्थ )Press Release ( for Publication/Circulation)

आरटीआई विशेषज्ञ संजय की चुनौती पर सामने नहीं आया यूपी का कोई सूचना
आयुक्त! अब अयोग्य सूचना आयुक्तों की नियुक्तियां रद्द कराने को उच्च
न्यायालय में याचिका दायर करेंगे संजय l None of 9 info commissioners
dared to accept RTI Expert Er. Sanjay Sharma's Challenge. "Shall adopt
High Court Route to get the appointments of all 9 incapable
info-commissioners of Uttar Pradesh nullified" asserts Sanjay.

आज आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान
धरना स्थल पर पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक संस्था 'येश्वर्याज
सेवा संस्थान' द्वारा जनसुनवाई और जनजागरूकता कैंप का आयोजन किया गया
तो वही लोक जीवन में पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के
मानवाधिकारों के संरक्षण के हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर
कार्यशील संस्था 'तहरीर' द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में धरना और यूपी के हालिया कार्यरत 9
सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनको कैमरे के सामने एक्ट
पर खुली बहस की आरटीआई विशेषज्ञ ई० संजय शर्मा द्वारा दी गयी चुनौती के
कार्यक्रम का आयोजन एक्शन ग्रुप फॉर राइट टु इनफार्मेशन , आरटीआई
कॉउंसिल ऑफ़ यूपी , ट्रैप संस्था अलीगढ , सूचना का अधिकार कार्यकर्ता
एसोसिएशन, पीपल्स फोरम, मानव विकास सेवा समिति मुरादाबाद , जन सूचना
अधिकार जागरूकता मंच,भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच , एसआरपीडी मेमोरियल
समाज सेवा संस्थान , आल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड ट्राइब्स
एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, भागीदारी मंच, सार्वजनिक जबाबदेही भारत
निर्माण मंच आदि संगठनों के साथ संयुक्त रूप से किया गया l कार्यक्रम
की अध्यक्षता तहरीर संस्था के संस्थापक और अध्यक्ष ईo संजय शर्मा ने की l
संजय शर्मा की गिनती देश के मूर्धन्य आरटीआई विशेषज्ञों में होती है और
उत्तर प्रदेश में आरटीआई के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का लोहा प्रदेश
के सभी आरटीआई कार्यकर्ता मानते हैं lकार्यक्रम में प्रतिभागी संगठनों के
प्रतिनिधियों के साथ साथ उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के सामाजिक
कार्यकर्ताओं ने प्रतिभाग किया l कैंप में आरटीआई विशेषज्ञों ने लोगों को
आरटीआई के जनोपयोगी प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया तो वही जनसुनवाई
में जनसूचना अधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी और सूचना आयोग की आरटीआई एक्ट
के क्रियान्वयन के प्रति उदासीनता से व्यथित लोगों ने अपनी समस्याएं
आरटीआई विशेषज्ञों के साथ साझा कर समस्याओ के समाधान के सम्बन्ध में
मार्गदर्शन प्राप्त किया l संयुक्त कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने अपनी
मांगों के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को सम्बोधित एक
मांगपत्र हस्ताक्षरित कर प्रेषित किया l कार्यक्रम में कामनवेल्थ
ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव नई दिल्ली की ओर से येश्वर्याज को निःशुल्क
उपलब्ध कराई गयी आरटीआई गाइड का भी निःशुल्क वितरण किया गया l



इस सम्बन्ध में बात करते हुए संजय शर्मा ने बताया कि लोक जीवन में
पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के
संरक्षण के हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील संस्था
'तहरीर' को प्राप्त प्रमाणों के आधार पर उन्हें यह कहने में कोई
गुरेज नहीं है कि सूचना आयुक्तों की अक्षमता के कारण ही आरटीआई के तहत
सूचना दिलाने बाली संस्था सूचना आयोग ही आज सूचना दिलाने के मार्ग की
सबसे बड़ी वाधा बन गयी है l संजय ने कहा कि इन सूचना आयुक्तों की
पोल-पट्टी खोलकर इनकी हकीकत संसार के सामने लाने के लिए ही उन्होंने
यूपी के हालिया कार्यरत 9 सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए
उनको कैमरे के सामने एक्ट पर खुली बहस की चुनौती दी है और कहा कि इन
आयुक्तों से हार जाने की दशा में उन्होंने इन आयुक्तों द्वारा मुक़र्रर
सजाये मौत तक की हर सजा को स्वीकारने का वादा भी किया है l संजय ने बताया
कि चुनौती के सम्बन्ध में उन्होंने राज्य सूचना आयोग को 2 ई-मेल दिनांक
09-10-14 और 10-10-14 को प्रेषित करने के साथ साथ उत्तर प्रदेश के राज्य
सूचना आयोग के सचिव के कार्यालय में दिनांक 10-10-14 को एक तीन पेज का
चुनौती पत्र व्यक्तिगत रूप से आयोग जाकर भी प्राप्त करा दिया है l संजय
ने बताया कि उनके आंकलन के अनुसार उत्तर प्रदेश के वर्तमान सूचना
आयुक्तों में से कोई भी सूचना आयुक्त पद के लिए निर्धारित योग्यताओं में
से 10% भी योग्यता धारित नहीं करते है l संजय बताते हैं कि प्रदेश के
सूचना आयुक्त का पद मुख्य सचिव के समकक्ष है और एक सवाल उठाते हैं कि
क्या यह माना जा सकता है कि जिस कार्यालय में योग्यतानुसार नियुक्त 9
मुख्य सचिव कार्यरत हों वहां ऐसी भयंकर बदहाली व्याप्त हो जबकि मात्र 1
मुख्य सचिव पूरा सूबा संभालता है ? इस सबाल का जबाब देते हुए संजय कहते
हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि वर्तमान में नियुक्त सभी सूचना आयुक्त
नितांत अयोग्य हैं और वे मात्र अपने राजनैतिक संबंधों के चलते ही यह
महत्वपूर्ण पद पा गए हैं l बौद्धिक असम्बेदनशीलता , अक्षमता और अपने
राजनैतिक आकाओं के दबाब के चलते ही वे अपने पद की गरिमा के अनुकूल कार्य
नहीं कर पा रहे हैं और इस उच्च पद को कलंकित कर रहे हैं l



आरटीआई विशेषज्ञ संजय शर्मा ने बताया कि उनकी खुली बहस की चुनौती पर आज
यूपी का कोई भी सूचना आयुक्तसामने नहीं आया l संजय ने अब अयोग्य सूचना
आयुक्तों की नियुक्तियां रद्द कराने को उच्च न्यायालय में याचिका दायर
करने का निर्णय लिया है l



आरटीआई एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश सूचना आयोग स्वयं
ही आरटीआई एक्ट का विनाश करने में लगा है l उर्वशी ने कहा कि यह
दुर्भाग्यपूर्ण है कि नौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के बाबजूद आयोग में
55000 से अधिक वाद लंबित हैं जो पूरे देश के सभी सूचना आयोगों में
सर्वाधिक हैं l नौ सालों में आयोग की नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है
और आयोग का हर कार्मिक मनमाने रूप से स्व घोषित नियमों के अनुसार कार्य
कर रहा है जिसके कारण उत्तर प्रदेश में लागू होने के 9 वर्षों में ही
सूचना का अधिकार लगभग मृतप्राय हो चुका है l



यूपी के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ लामबंद हुए संगठनों ने एक सुर से
सूचना आयुक्तों द्वारा आयुक्त पद ग्रहण करने के बाद से अब तक की अवधि में
चल-अचल सम्पत्तियों में किये गए निवेशों को सार्वजनिक कराने, यूपी के
अक्षम सूचना आयुक्तों को तत्काल निलंबित कर के उनके अब तक के कार्यों की
विधिक समीक्षा कराकर इनके विरुद्ध कार्यवाही कराने , सूचना आयुक्तों के
रिक्त पदों पर पद की योग्यतानुसार पारदर्शी प्रक्रिया से सूचना आयुक्तों
की नियुक्ति कराने , 55000 से अधिक लम्वित वादों की विशेष सुनवाईयां
शनिवार और रविवार के अवकाश के दिनों में कराने, आयोग की नियमावली तत्काल
लागू कराने,आयोग में नयी अपीलों और शिकायतों के प्राप्त होने के 1
सप्ताह के अंदर प्रथम सुनवाई कराने, आदेशों की नक़ल आदेश होने के 1 सप्ताह
के अंदर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कराने, सूचना आयोग में रिश्वत मांगे
जाने की शिकायतें करने के लिए एक सतर्कता अधिकारी नियुक्त कराने , अपीलों
और शिकायतों की सुनवाई की अगली तारीखें अधिकतम 30 दिन बाद की देने,सूचना
आयुक्तों और नागरिकों/ आरटीआई कार्यकर्ताओं के पारस्परिक संवाद की
प्रणाली विकसित करके प्रतिमाह एक बैठक कराने, आरटीआई कार्यकर्ताओं को
जनहित के लिए सूचना मांगने को प्रेरित करने का तंत्र विकसित कराने ,
सूचना आयोग में वादियों के मानवाधिकारों को संरक्षित रखने हेतु उनको खड़ा
कर के सुनवाई करने के स्थान पर कुर्सी पर बैठाकर सुनवाई कराने ,
वादियों को झूठे मामलों में फसाए जाने की स्थिति में अपना समुचित वचाव
करने के लिए वादी द्वारा मांगे जाने पर आयोग की सीसीटीवी फुटेज तत्काल
उपलब्ध कराने, आयुक्तों द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की
सुविधानुसार बदलने की प्रवृत्ति रोकने के लिए आयुक्त के स्टेनो की
शॉर्टहैंड बुक पर पेंसिल के स्थान पर पेन से लिखना अनिवार्य करने तथा
शॉर्टहैंड बुक पर उपस्थित वादी और प्रतिवादी के हस्ताक्षर कराने ,
आयुक्तों द्वारा दण्डादेशों को बापस लेने के असंवैधानिक कारनामों पर
तत्काल रोक लगाने, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के तहत तत्काल
समिति बनाकर इस समिति द्वारा अब तक सूचना आयुक्तों के विरुद्ध महिलाओं
द्वारा की गयी उत्पीड़न की शिकायतों की तत्काल जांच कराने, आयोग के
कार्यालयीन कार्यों की लिखित प्रक्रिया बनाये जाने, आयोग के द्वारा
सम्पादित कार्यों की मासिक रिपोर्ट तैयार कराकर स्वतः ही सार्वजनिक
कराने आदि मांगों के साथ धरना देते हुए राज्यपाल को एक ज्ञापन भी प्रेषित
किया l


कार्यक्रम का समापन करते हुए येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव उर्वशी
शर्मा ने सभी आगंतुकों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए 3 माह में उनकी
मांगें न माने जाने पर प्रदेश के अन्य सभी संगठनों को साथ लेकर सूचना
आयोग और प्रदेश सरकार के खिलाफ वृहद स्तर पर उग्र आंदोलन करने को तैयार
रहने का आव्हान किया l




--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
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उत्तर प्रदेश में सूचना का अधिकार ( आरटीआई ) का वजूद बचाये रखने के लिए धरना प्रदर्शन आज लखनऊ में

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Dharna ( demonstration ) in Lucknow today to save Right to Information ( RTI ) regime in Uttar Pradesh

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आरटीआई विशेषज्ञ ई० संजय शर्मा

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RTI Expert Er. Sanjay Sharma

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RTI activists up in arms against Uttar Pradesh info officers

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RTI activists up in arms against Uttar Pradesh info officers

Oct 12, 2014 | Age Correspondent l Lucknow

http://wwv.asianage.com/india/rti-activists-arms-against-uttar-pradesh-info-officers-087

The RTI activists in Uttar Pradesh are up in arms against the state
information commissioners (SIC) and are accusing them of holding back
information to protect the government's interests. The RTI activists,
under the banner of half a dozen organisations, will be holding a
demonstration on Sunday to protest against the attitude of the SICs
and have even challenged them to an open debate.

According to Sanjay Sharma, who heads the 'Tehreer ' organisation and
is a well known RTI activist, said that the state information
commission was not acting as a custodian of people's rights. "Instead,
the nine SICs who have apparently been appointed for their political
loyalties are busy withholding information and protecting the
government."

He said that over 55,000 cases were pending with the state information
commission which was indicative of the prevailing state of affairs.
"There is no guideline for clearing a case within the time frame or
even hearing it. This causes great inconvenience and the spirit of the
RTI gets demolished," he said.

--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
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Saturday, 11 October 2014

आमंत्रण एवं प्रकाशनार्थ : आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर 'येश्वर्याज' द्वारा आयोजित जनसुनवाई, कैंप एवं 'तहरीर' द्वारा आयोजित धरना, सूचना आयुक्तों को चुनौती लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक l

प्रिय मित्र,
आप अवगत हैं कि आरटीआई एक्ट की नौवीं सालगिरह पर पारदर्शिता और जबाबदेही
की हमारी मुहिम की श्रंखला में उत्तर प्रदेश के सामाजिक संगठनों के साथ
कल 12 अक्टूबर 2014 को 'येश्वर्याज' द्वारा जनसुनवाई, कैंप एवं 'तहरीर'
द्वारा धरना, सूचना आयुक्तों को चुनौती का कार्यक्रम लक्ष्मण मेला
मैदान धरना स्थल पर पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक आयोजित किया
जा रहा है l

इस कार्यक्रम में येश्वर्याज सेवा संस्थान , एक्शन ग्रुप फॉर राइट टु
इनफार्मेशन , आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़ यूपी , ट्रैप संस्था अलीगढ , सूचना का
अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, पीपल्स फोरम, मानव विकास सेवा समिति
मुरादाबाद , जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच,भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच
, एसआरपीडी मेमोरियल समाज सेवा संस्थान , आल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स
एंड शैडयूल्ड ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, भागीदारी मंच,
सार्वजनिक जबाबदेही भारत निर्माण मंच आदि संगठन शिरकत कर रहे है l

कार्यक्रम में कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव नई दिल्ली की ओर से
येश्वर्याज को निःशुल्क उपलब्ध कराई गयी आरटीआई गाइड का भी निःशुल्क
वितरण किया जायेगा l


आपसे अनुरोध है कि कृपया अपने माध्यम से अधिक से अधिक जनसामान्य को हमारी
मुहिम से जोड़ने और हमारे कार्यक्रम में उपस्थित होने की कृपा करें l

कृतिदेव फोंट में विज्ञप्ति कार्यक्रम का पोस्टर और सूचना आयोग को
प्रेषित चुनौती पत्र भी आपके समक्ष प्रस्तुत है l

सादर l


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838


http://upcpri.blogspot.in/


Note : if you don't want to receive mails from me,kindly inform me so
that i should delete your name from my mailing list.

RTI Expert Er. Sanjay Sharma

--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
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संस्था 'तहरीर' की यूपी के हालिया कार्यरत 9 सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते हुए उनको कैमरे के सामने एक्ट पर खुली बहस की चुनौती

Taken from facebook wall of Sanjay Sharma

साथियों,
मैंने यूपी के हालिया कार्यरत 9 सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप
लगाते हुए उनको कैमरे के सामने एक्ट पर खुली बहस की चुनौती दी है l इसके
लिए मैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल
पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक उपस्थित
रहूंगा l लोक जीवन में पारदर्शिता संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के
मानवाधिकारों के संरक्षण के हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर
कार्यशील संस्था 'तहरीर' से प्राप्त सूत्रों के आधार पर मुझे यह कहने
में कोई गुरेज नहीं है कि सूचना आयुक्तों की अक्षमता के ही कारण आरटीआई
के तहत सूचना दिलाने बाली संस्था सूचना आयोग ही आज सूचना दिलाने के
मार्ग की सबसे बड़ी वाधा बन गयी है l

'तहरीर' वेहद शुक्रगुज़ार है येश्वर्याज सेवा संस्थान, एक्शन ग्रुप फॉर
राइट टु इनफार्मेशन , आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़ यूपी , ट्रैप संस्था अलीगढ ,
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, पीपल्स फोरम, मानव विकास सेवा
समिति मुरादाबाद , जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच,भ्रष्टाचार हटाओ देश
बचाओ मंच , एसआरपीडी मेमोरियल समाज सेवा संस्थान , आल इण्डिया शैडयूल्ड
कास्ट्स एंड शैडयूल्ड ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, भागीदारी मंच
और सार्वजनिक जबाबदेही भारत निर्माण मंच जैसे उन तमाम संगठनों का जो
न केवल हमारे विचारों से इत्तेफाक रखते हैं अपितु हमारी इस लड़ाई में कंधे
से कंधा मिलाकर हमारा साथ भी दे रहे हैं l



मैं 'तहरीर' की ओर से आपको उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला
मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे इस कार्यक्रम
में आने का निमंत्रण दे रहा हूँ l आशा है पारदर्शिता संवर्धन और
जबाबदेही निर्धारण की हमारी इस मुहिम में आप हमारा साथ अवश्य देंगे l



ई मेल भेजने के अतिरिक्त मैंने इस सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के राज्य
सूचना आयोग के सचिव के कार्यालय में एक तीन पेज का चुनौती पत्र भी
प्राप्त करा दिया है जिसकी स्कैन्ड कॉपी अपलोड कर रहा हूँ l


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
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Alleging incapacity, a Activist Challenges 9 Info-Commissioners of UP for an open in-camera debate on RTI: Mounting grievances against Grievance Redressal Forum attributed mainly to the incapacity of Info-Commissioners : Public hearing & Awareness Camp by ‘YAISHWARYAJ’ and Demonstration under the aegis of ‘TAHRIR’ over the dismal performance of the State Information Commission at Laxman Mela Maidaan Dharna Sthal in State Capital Lucknow on 12.10.2014 from 11A.M. to 03 P.M. : Programs supported by more than a dozen Social organizations of U.P.

Lucknow : More than a dozen Social organization of Uttar Pradesh have
joined hands with Lucknow based NGO 'YAISHWARYAJ' and Social Group
'TAHRIR' for a Public Hearing & Awareness Camp on RTI and to protest
against the growing problems of RTI users of the State.

YAISHWARYAJ has decided to hold a public hearing & Awareness Camp on
RTI on the same day at same time at same venue.

TAHRIR ( Transparency, Accountability & Human Rights' Initiative for
Revolution ) is a Bareilly/Lucknow based Social Organization working
for transparency enhancement in public life, fixing of accountability
in public life effectively and also for protection of Human Rights.
Founder President of TAHRIR Er. Sanjay Sharma through his E-mail dated
09-10-14, has apprised UPSIC , Chief Justice of India, Governor of
UP, DM & SSP of Lucknow about the problems continuously persisting at
UPSIC and has attributed most of these to the incapacity of
info-commissioners. Through his e-mail, Sanjay has Challenged all 9
info-commissioners to participate in an open in camera debate over RTI
at Laxman Mela Maidaan Dharna Sthal in State Capital Lucknow on
12.10.2014 anytime between 11A.M. to 03 P.M. either simultaneously or
one by one.

TAHRIR's initiative has garnered support of YAISHWARYAJ Seva Sansthaan
Lucknow, Action Group for Right to Information Lucknow, RTI Council of
Uttar Pradesh, Soochna Ka Adhikaar Karyakarta Association, Peoples'
Forum, Manav Vikas Seva Samiti Moradabad,Jan Soochna Adhikaar
Jaagrookta Manch Lucknow , TRAP Aligarh,Bhrashtachaar Hatao Desh
Bachao Manch, SRPDMS Seva Sansthaan,All India Scheduled Caste &
Scheduled Tribes employees Welfare Association , Bhageedaaree Manch
and Sarvajanik Jababdehee Bharat Nirmaan Manch Lucknow.

Letter as sent by Er. Sanjay Sharma to UPSIC , Chief Justice of India,
Governor of UP, DM & SSP of Lucknow is being copy pasted below for
your perusal.
Sanjay Sharma
<tahririndia@gmail.com> Thu, Oct 9, 2014 at 11:32 AM
To: sec.sic@up.nic.in, scic.up@up.nic.in
Cc: supremecourt <supremecourt@nic.in>, hgovup <hgovup@up.nic.in>,
hgovup <hgovup@nic.in>, hgovup <hgovup@gov.in>, uppcc@up.nic.in,
uppcc-up@nic.in, dgp@up.nic.in, dgpolice@sify.com, adglo.up@nic.in,
digrlkw@up.nic.in, "dmluc@up.nic.in\" <dmluc@up.nic.in>, \"dmluc\""
<dmluc@nic.in>, ssplkw-up@nic.in
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- Hide quoted text -
To,
Sri Sudesh Kumar Ojha - Secretary
Uttar Pradesh State Information Commission
6th Floor,Indira Bhavan,Ashok Marg,Lucknow
Uttar Pradesh,India,India, Pin Code-226001

Sub: Dismal Performance of Uttar Pradesh State Information Commission
: Social Organization TAHRIR's request to take effective measures to
save transparency regime in Uttar Pradesh and also to accept challenge
for an open in-camera discussion on RTI act with all nine Information
Commissioners to expose their incapacity before the nation.

Sir,
TAHRIR ( Transparency, Accountability & Human Rights' Initiative for
Revolution ) is a Bareilly/Lucknow based Social Organization working
for transparency enhancement in public life, fixing of accountability
in public life effectively and also for protection of Human Rights. In
its recently held meeting ,Transparency wing of TAHRIR discussed
various issues related to transparency regime of Uttar Pradesh and
based on feedback received from various RTI users and volunteers of
various social organizations of Uttar Pradesh concluded that dismal
performance of Uttar Pradesh State Information Commission can mainly
be attributed to complete ignorance of provisions of RTI act by
present Information Commissioners. It was also decided that to expose
this particular incapacity of nine information commissioners before
the nation, Social Organization TAHRIR should raise a challenge for
an open in-camera discussion on compliance of various provisions of
RTI act with all nine Information Commissioners.

As Founder President of 'TAHRIR', through your goodself, I am sending
this challenge letter to all nine Information Commissioners,
presently working with UPSIC, to accept my challenge for an open
in-camera discussion on RTI act on 12th October 2014 ( Sunday ) at
Laxman Mela Maidaan Dharna Sthal in State Capital Lucknow anytime
between 11A.M. to 03 P.M.. I alone, shall take on all nine Information
Commissioners Simultaneously.

This is noteworthy that on the issue of pathetic state of
implementation of transparency law in the state of Uttar Pradesh,
TAHRIR has recently given a memorandum to the Governor of Uttar
Pradesh also. Our organization, as a watchdog of transparency regime
in the state of U.P. is really concerned over dismal performance of
Uttar Pradesh State Information Commission. Presently, though there
are nine information commissioners, it is as if they all are defunct
as pendency stands at an unimaginable 55000 cases. Many cases
registered in year 2009 are still pending in UPSIC. There is complete
absence of a policy for disposal of pending cases, registering and
hearing of Second Appeals and Complaints. Even after (almost) 9 years
of enactment of RTI act , Uttar Pradesh State Information Commission
has not yet approved its rules.

As soon as any Second appeal or Complaint is registered the same
should be allotted to one of the commissioners for further action but
this is not happening at all and lead time for first hearing of a
fresh appeal or complaint has risen to somewhere around 6-12 months
depending on a particular information commissioner. Present
Information Commissioners are not aware of basic statutory provisions
of the act and they are hearing the cases arbitrarily on their own
whims & fancies. So far as complaints are concerned, some Information
Commissioners are hearing them, Some are treating them as first
appeals & sending these to concerned public authorities while some are
rejecting them out-rightly.

None of the offices of information Commissioners is delivering orders
unless their palms are greased. Even while adjourning the cases, no
uniformity is being maintained. Adjournments ranging from 30 days to 6
months has come to our knowledge. In the absence of approved rules,
there is no uniformity in any of the procedures followed by
Information Commissioners or the administrative staff of UPSIC.

Information Commissioners are adamant and reluctant in meeting the
Citizens and Activists and are devising cheap means like registering
false F.I.R.s against activists, insulting and misbehaving with
activists in hearings just to avoid hearing of appeals and complaints
filed by Activists. This has resulted in anarchy in the Commission.
Information Commissioners are not dictating complete orders in the
open court resulting in raising number of complaints of tampered
orders managed by public authorities in their favor.RTI users are
accusing information commissioners of revoking penalty orders as they
have acquired some financial or other interest.

TAHRIR has no hesitation to say that so called 'person of eminence' of
state, handpicked as Information Commissioners by state government in
the guise of selection, are now showing their real face and proving
themselves to be 'person of real disgrace' to the state.

In these Circumstances, In its Quest for Transparency, TAHRIR has also
decided to hold a Protest at Laxman Mela Maidaan Dharna Sthal in State
Capital Lucknow on 12.10.2014 from 11A.M. to 03 P.M. against dismal
performance of UPSIC.

Please take note of abovementioned facts, take effective measures to
save transparency regime in Uttar Pradesh and covey the challenge of
'TAHRIR' to all nine Information Commissioners, presently working
with UPSIC, to accept our challenge for an open in-camera discussion
on RTI act on 12th October 2014 ( Sunday ) at Laxman Mela Maidaan
Dharna Sthal in State Capital Lucknow anytime from 11A.M. to 03 P.M.
where I alone, shall wait to take on all nine Information
Commissioners Simultaneously to expose their incapacity before the
nation.

Copy Being sent with humble Regards for necessary action to :
1- Hon'ble the Chief Justice of India, Supreme Court of India, New Delhi.
2- Hon'ble the Governor of Uttar Pradesh, Lucknow.
3- District Magistrate of Lucknow.
4- SSP of Lucknow.

Sincerely yours,

( Er. Sanjay Sharma )
Founder & Chairman
ransparency, Accountability & Human Rights Initiative for Revolution
101,Narain Tower,F Block,Rajajipuram
Lucknow,Uttar Pradesh-226017
E-mail tahririndia@gmail.com
Mobile 9369613513

Letter No. : TAHRIR/5/2014-15/141009
Date : 09-10-2014









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-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
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Friday, 10 October 2014

Saifai Mahotsav: A closely guarded secret

Saifai Mahotsav: A closely guarded secret

Neha Shukla,TNN | Oct 10, 2014, 07.43 PM IST

http://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/Saifai-Mahotsav-A-closely-guarded-secret/articleshow/44775263.cms



LUCKNOW: Saifai mahotsav organised in December last year is a
closely-guarded secret for UP government so much so that even an RTI
application could not elicit any response from the government. Worse,
UP state information commission (UPSIC) refused to listen to the
applicant's complaint.

UP government faced lot of flak for being insensitive and having
splurged money on holding bollywood extravaganza in Saifai, in
December last year, while victims of Muzaffarngar violence lived under
apathetic conditions in relief camps.

The RTI application filed by activist Sanjay Sharma on January 13,
2014, in the office of the district magistrate, Etawah has got no
response till date. The application sought response on the money spent
in holding the event, guest list, programme list, money spent by
district administration and state government and frequency of flights
that operated to bring guests to the venue.

"On none of the eleven points information ever came," said Sharma.
After the application did not fetch any response from the Etawah's DM
office, applicant filed a complaint with the UPSIC in August, but,
that was dismissed by the commission without holding even a single
hearing.

Mahotsav is one of the most awaited annual events for SP held in
Mulayam Singh Yadav's native village, Saifai, in Etawah. Mulayam
Singh's nephew Ranbir Singh used to hold an annual wrestling meet in
Saifai but after his untimely demise in 1997, the party started
organising the event as Saifai Mahotsav every year to promote local
talent in sports.

Though bollywood's presence has always added glitz and glamour to the
event, this time it drew flak from all quarters, political and social,
for wasting the taxpayers' money at the place where it was not meant
to.

"I have sent my complaint to the governor's office now," said Sharma.


--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
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उत्तर प्रदेश सूचना आयोग के खिलाफ 12 अक्टूबर को लखनऊ में धरना प्रदर्शन

http://main.hindusthansamachar.com//Encyc/2014/10/8/%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%86%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AB-12-%E0%A4%85%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%96%E0%A4%A8%E0%A4%8A-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8.aspx?NB=&lang=1000&m1=&m2=&p1=&p2=&p3=&p4=

स्रोत: HS-Delhi तारीख: 08 Oct 2014 19:51:09
लखनऊ, 08 अक्टूबर(हि.स.)। उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ
लामबंद हुए ग्यारह सामाजिक संगठन 12 अक्टूबर को स्थानीय लक्ष्मण मेला
मैदान में धरना देंगे। सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता संजय शर्मा ने यह
जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सूचना आयोग आरटीआई ......

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UPSIC back to its old ways

http://timesofindia.indiatimes.com/city/lucknow/UPSIC-back-to-its-old-ways/articleshow/44759795.cms

UPSIC back to its old ways

Neha Shukla,TNN | Oct 9, 2014, 09.21 PM IST

LUCKNOW: UP State Information Commission (UPSIC) turns deaf to
applicants' woes. Information commissioners (ICs) are refusing to hear
complaints filed under section 18 of the RTI Act.

Surprisingly, ICs are going against the 2010 order of the then chief
information commissioner (CIC), UP, Ranjit Singh Pankaj, which
directed all ICs to register and hear complaints filed by applicants
using the provisions of the Act.

Copies of complaints procured by TOI show that either the ICs are
refusing to hear the complaints or getting them converted into first
appeals thus causing further delay to applicant's bid to obtain
information.

"Complaints are being converted into first appeal under section 19(1)
of the Act and then sent to the first appeals authority of the
department. Complaint is thus disposed of in the first hearing," said
RTI activist Sanjay Sharma.

In that case, if first appeals authority does not respond to the
appeal, applicant has no option but to move second appeal to the
commission and wait for hearing.

ICs, however, have a different say. UPSIC gets more complaints than
appeals. Since first appeals authority is almost redundant in UP,
applicants do not file appeals but complaints to get information. The
reason why some of the complaints, which were filed without filing
appeals, were converted into appeals, says one of the ICs.

Former information commissioner, UPSIC, Gyanendra Sharma, said,
"Section 18 gives more powers to UPSIC than Section 19. It should be
followed in letter and spirit. Using the powers Section 18 bestows,
Public Information Officers (PIOs) should be summoned with all the
information and the applicant should be provided the same before the
complaint is disposed of."

Section 18 empowers ICs to penalize officer for delaying information
to the seeker, issue summons to authorities and also initiate inquiry
if the need be.

--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
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Thursday, 9 October 2014

यूपी के जनसूचना आयुक्तों पर गंभीर आरोप : लखनऊ में सूचना आयुक्तों के खिलाफ 12 को धरना : कई आरटीआई संगठन हुए लामबंद-ई संजय शर्मा

http://www.swatantraawaz.com/headline/3609.htm


यूपी के जनसूचना आयुक्तों पर गंभीर आरोप
लखनऊ में सूचना आयुक्तों के खिलाफ 12 को धरना
कई आरटीआई संगठन हुए लामबंद-ई संजय शर्मा

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 9 October 2014 05:34:22 AM
er san̄jaya śarmā

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग सूचना आयुक्तों पर गंभीर आरोप
लगाते हुए कई सामाजिक संगठन उनके खिलाफ लामबंद हो गए हैं। आरटीआई संगठनों
ने यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का भी आरोप लगाया है और
उन्हेंसूचना एक्ट पर खुली बहस की चुनौती दी है। सूचना आयुक्तों के खिलाफ
बारह अक्टूबर को लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान में धरना-अनशन स्थल पर धरना
देने की घोषणा भी की गई है।आरटीआई कार्यकर्ता और 'तहरीर' के संस्थापक
अध्यक्ष ई संजय शर्मा ने एक ईमेल में आरोप लगाया है कि वर्तमान में
कार्यरत नौ सूचना आयुक्तों का राज्य सूचना आयोग में बेहद निराशाजनक
प्रदर्शन है जिसके विरोध में प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठन 'तहरीर' के
साथ इकट्ठे होकर राजधानी लखनऊ में उस दिन पूर्वांह 11 बजे से अपरान्ह 3
बजे तक धरना-प्रदर्शन करेंगे।
तहरीर के अध्यक्ष ई संजय शर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम में येश्वर्याज
सेवा संस्थान, एक्शन ग्रुप फॉर राइट टु इनफार्मेशन, आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़
यूपी, ट्रैप संस्था अलीगढ़, सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, मानव
विकास सेवा समिति मुरादाबाद, जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच, भ्रष्टाचार
हटाओ देश बचाओ मंच, एसआरपीडी मेमोरियल समाज सेवा संस्थान, आल इंडिया
शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन आदि
संगठन शिरकत करेंगे। ई संजय शर्मा ने बताया कि 'तहरीर' उत्तर प्रदेश
स्थित एक जन संघर्षशील सामाजिक संगठन है, जो लोक जीवन में पारदर्शिता
संवर्धन, जवाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के
हितार्थ जमीनी स्तर पर कार्यशील है। तहरीर की कार्यप्रणाली अन्य सामाजिक
संगठनों से कुछ भिन्न है, 'तहरीर' का सूत्रवाक्य है-'अपनी शक्ति आप हैं'।
'तहरीर' सभी नागरिकों की आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर समुचित रूप से
प्रशिक्षित कर उनको उनकी लड़ाई स्वयं ही लड़ने के लिए तैयार करती है और
उनको परदे के पीछे रहकर अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान करते हुए विजयश्री
दिलाती है। संजय शर्मा ने बताया कि पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी
औजार आरटीआई एक्ट को लागू हुए बारह अक्टूबर को 9 वर्ष पूरे हो जाएंगे।
लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश में
पारदर्शिता कानून के क्रियांवयन की दुर्दशा के संबंध में 'तहरीर' संगठन
ने हाल ही में राज्यपाल को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया था। संजय शर्मा ने
कहा कि आरटीआई एक्ट में सूचना आयोग की भूमिका एक्ट के संरक्षक की है,
परंतु दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग आरटीआई एक्ट के संरक्षक
के स्थान पर एक्ट के प्राविधानों के क्रियांवयन के मार्ग के विनाशक के
रूप में सामने आ रहा है।
ई संजय शर्मा का कहना कि उत्तर प्रदेश में नौ सूचना आयुक्त होने के
बावजूद 55,000 से अधिक वादों का लंबित होना आयोग में व्याप्त
दुर्व्यवस्थाओं का हाल स्वयं ही बयान कर रहा है। नौ साल में आयोग की
नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है, आयोग में लंबित वादों की सुनवाई, नई
अपीलों और शिकायतों का पंजीकरण और सुनवाई, आदेशों की नक़ल देने आदि की कोई
स्पष्ट एवं स्थापित व्यवस्था तक नहीं है, वर्तमान सूचना आयुक्त आयोग के
अधिनियम के बाध्यकारी प्राविधानों को समझने और क्रियांवित कराने में
पूर्णतया असफल रहे हैं और सूचना आयुक्त वादों की सुनवाई मनमाने ढंग से और
अपनी व्यक्तिगत सनक के आधार पर कर रहे हैं। संजय शर्मा का दावा है कि
उत्तर प्रदेश सूचना आयोग का एक भी आदेश विधिक मापदंडों के अनुसार की गई
जांच में पास नहीं हो पाएगा, सूचना आयुक्त न तो अधिनियम और कानून जानते
हैं और न ही बताने पर जानने का प्रयास करते हैं। अधिकांश सूचना आयुक्त
अधिनियम के तहत प्राप्त शिकायतों का संज्ञान नहीं ले रहे हैं और इन
शिकायतों को सरसरी तौर पर खारिज करने का असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं।
ई संजय शर्मा ने एक साथ सभी आयुक्तों को अधिनियम के प्राविधानों पर
इन-कैमरा बहस हेतु खुली चुनौती दी है, जिसका सभी सामाजिक संगठनों ने
समर्थन किया है। संजय शर्मा कहते हैं कि सूचना आयोग में बदहाली का आलम ये
है कि बिना रिश्वत दिए आयोग के आदेशों की नक़ल भी नहीं मिलती है, तीस दिन
में सूचना देने के लिए बने एक्ट के तहत आयोग में अपील करने पर 6 माह से 1
साल में सुनवाई का नंबर आता है और अगली तारीखें भी 30 दिन से 6 माह तक की
दी जा रही हैं। सूचना आयुक्त नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं से मिलने
के कतई इच्छुक नहीं हैं और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने जनहित के लिए मांगी गई
सूचनाओं पर दायर अपीलों की सुनवाइयों से पीछा छुड़ाने के लिए कार्यकर्ताओं
को सुनवाई में बेइज़्ज़त करने, उनके साथ बदसलूकी करने और यहां तक कि
कार्यकर्ताओं पर सरकारी कार्य में बाधा पंहुचाने की झूठी ऍफ़आईआर लिखाने
जैसी पतित और तुच्छ कारगुजारियां कर रहे हैं।
वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है कि यह कहना अनुचित न होगा कि सूचना
आयोग में सर्वत्र पूर्णतः अराजकता व्याप्त है और सूचनार्थी यदि आयोग में
हैं तो मानिए खतरे में हैं। आयुक्तों के पारित आदेश लोक प्राधिकारियों की
सुविधानुसार बदलने, दंड आदेशों को असंवैधानिक रूप से वापस लेने जैसे
कारनामों के चलते 'तहरीर' को यह कहने में गुरेज़ नहीं है कि 'विख्यात
व्यक्ति' के रूप में चयन के परदे के पीछे मनोनीत सूचना आयुक्त अब अपना
असली 'कुख्यात व्यक्ति' का चेहरा प्रदेश को दिखा रहे हैं, जिसका
दुष्परिणाम पूरा प्रदेश भुगत रहा है। संजय शर्मा ने कहा है कि उत्तर
प्रदेश में पारदर्शिता कानून की हत्या किए जाने की इन परिस्थितियों में
पारदर्शिता संवर्धन के लिए वचनबद्ध संगठन 'तहरीर' मूकदर्शक बना नहीं रह
सकता और इसीलिए 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी औजार
आरटीआई एक्ट के नौवें साल पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक
प्रदर्शन के विरोध में धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है। इस
अवसर पर कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव नई दिल्ली की ओर से
येश्वर्याज को निःशुल्क उपलब्ध कराई गई आरटीआई गाइड का भी निःशुल्क वितरण
किया जाएगा।

--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
Secretary - YAISHWARYAJ SEVA SANSTHAAN
101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
Contact 9369613513
Right to Information Helpline 8081898081
Helpline Against Corruption 9455553838


http://upcpri.blogspot.in/


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that i should delete your name from my mailing list.

यूपी के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ लामबंद हुए सामाजिक संगठन देंगे धरना : यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते आरटीआई संगठनों ने दी एक्ट पर खुली बहस की चुनौती : सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई विशेषज्ञ और 'तहरीर' के संस्थापक और अध्यक्ष ई० संजय शर्मा ने दी है वर्तमान कार्यरत नौ सूचना आयुक्तों से एक साथ अकेले खुली वहस करने की चुनौती

यूपी के राज्य सूचना आयोग के खिलाफ लामबंद हुए सामाजिक संगठन देंगे
धरना : यूपी के सूचना आयुक्तों पर अक्षमता का आरोप लगाते आरटीआई संगठनों
ने दी एक्ट पर खुली बहस की चुनौती : सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई विशेषज्ञ
और 'तहरीर' के संस्थापक और अध्यक्ष ई० संजय शर्मा ने दी है वर्तमान
कार्यरत नौ सूचना आयुक्तों से एक साथ अकेले खुली वहस करने की चुनौती


उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में
प्रदेश के बिभिन्न सामाजिक संगठनों ने 'तहरीर' नामक संस्था के साथ
इकट्ठे होकर राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर
2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन करने का
निर्णय लिया है l इस कार्यक्रम में येश्वर्याज सेवा संस्थान, एक्शन ग्रुप
फॉर राइट टु इनफार्मेशन , आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़ यूपी , ट्रैप संस्था अलीगढ ,
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, मानव विकास सेवा समिति मुरादाबाद
, जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच,भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच , एसआरपीडी
मेमोरियल समाज सेवा संस्थान , आल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड
ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन, भागीदारी मंच आदि संगठन शिरकत कर
रहे है l


इस बारे में बात करते हुए तहरीर के संस्थापक संजय ने बताया " 'तहरीर'
उत्तर प्रदेश स्थित सामाजिक संगठन है जो लोक जीवन में पारदर्शिता
संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के
हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील है l 'तहरीर' की कार्य
प्रणाली अन्य सामाजिक संगठनों से कुछ भिन्न है l 'तहरीर' का सूत्रवाक्य
"अपनी शक्ति आप" है और 'तहरीर' अपने सदस्यों की समस्याओं का हल करने को
उन सदस्यों को अन्य सामाजिक संगठनों की भाँति अपने पीछे-पीछे दौड़ाकर बार
बार अपने अग्रजनों की श्रेष्ठता दिखाने के बजाये सभी नागरिकों की
आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है और हमारी कोर टीम अपने
सदस्यों को समुचित रूप से प्रशिक्षित कर उनको उनकी लड़ाई स्वयं ही लड़ने के
लिए तैयार करती है और उनको परदे के पीछे रहकर अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान
करते हुए विजयश्री दिलाती है lआने बाले 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन
के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई एक्ट को लागू हुए 9 वर्ष पूरे हो रहे हैं l
बीते सप्ताह 'तहरीर' की पारदर्शिता विंग की सभा में यह निर्णय लिया गया
था कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में
सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान
धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन किया जाये lउत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून के
क्रियान्वयन की दुर्दशा के सम्बन्ध में 'तहरीर' संगठन ने हाल ही में
सूबे के राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित किया था l"


संजय ने बताया कि आरटीआई एक्ट में सूचना आयोग की भूमिका एक्ट के संरक्षक
की है परन्तु दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग आरटीआई एक्ट के
संरक्षक के स्थान पर एक्ट के प्राविधानों के क्रियान्वयन के मार्ग के
विनाशक के रूप में सामने आ रहा है lनौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के
बाबजूद 55000 से अधिक वादों का लम्वित होना आयोग में व्याप्त
दुर्व्यवस्थाओं का हाल स्वयं ही वयाँ कर रहा है lनौ सालों में आयोग की
नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है l आयोग में लंबित वादों की सुनवाई , नयी
अपीलों और शिकायतों पंजीकरण और सुनवाई, आदेशों की नक़ल देने आदि की कोई
स्पष्ट एवं स्थापित व्यवस्था नहीं है lअभी तक के कार्यकाल में वर्तमान
सूचना आयुक्त अधिनियम के वाध्यकारी प्राविधानों को समझने और क्रियान्वित
कराने में पूर्णतया असफल रहे हैं और सभी आयुक्तों द्वारा वादों की सुनवाई
मनमाने ढंग से और अपनी व्यक्तिगत सनक के आधार पर की जा रही है l



संजय का दावा है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग का एक भी आदेश विधिक
मापदंडों के अनुसार की गयी जांच में पास नहीं हो पायेगा lसूचना आयुक्त न
तो अधिनियम और कानून जानते हैं और न ही बताने पर जानने का प्रयास करते
हैं l अधिकांश सूचना आयुक्त अधिनियम के तहत प्राप्त शिकायतों का संज्ञान
नहीं ले रहे हैं और इन शिकायतों को सरसरी तौर पर खारिज करने का
असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं l संजय ने व्यक्तिगत रूप से अकेले ही एक
साथ सभी आयुक्तों को अधिनियम के प्राविधानों पर इन-कैमरा बहस हेतु खुली
चुनौती दी है जिसका सभी सामाजिक संगठनों ने समर्थन किया है l गौरतलब है
कि संजय शर्मा की गिनती देश के मूर्धन्य आरटीआई विशेषज्ञों में होती है
और उत्तर प्रदेश में आरटीआई के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता का लोहा
प्रदेश के सभी आरटीआई कार्यकर्ता मानते हैं l


संजय कहते हैं कि सूचना आयोग में बदहाली का आलम ये है कि बिना रिश्वत दिए
आयोग के आदेशों की नक़ल भी नहीं मिलती है l 30 दिन में सूचना देने के लिए
बने एक्ट के तहत आयोग में अपील करने पर 6 माह से 1 साल में सुनवाई का
नंबर आता है और अगली तारीखें भी 30 दिन से 6 माह तक की दी जा रही हैं
lसूचना आयुक्त नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं से मिलने के कतई इच्छुक
नहीं हैं और आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा जनहित के लिए माँगी गयी सूचनाओं
पर दायर अपीलों की सुनवाइयों से पीछा छुड़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को
सुनवाई में बेइज़्ज़त करने, उनके साथ बदसलूकी करने और यहाँ तक कि
कार्यकर्ताओं पर सरकारी कार्य में वाधा पंहुचाने की झूठी ऍफ़ आई आर लिखाने
जैसी पतित और तुच्छ हरकतें करने जैसी कारगुजारियां एक सोची समझी रणनीति
के तहत कर रहे हैं l कहना अनुचित न होगा की आयोग में सर्वत्र पूर्णतः
अराजकता व्याप्त है और सूचनार्थी यदि आयोग में है तो मानिए खतरे में है
lआयुक्तों द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की सुविधानुसार बदलने,
दण्डादेशों को असंवैधानिक रूप से बापस लेने जैसे कारनामों के चलते
'तहरीर' को यह कहने में गुरेज़ नहीं है कि 'विख्यात व्यक्ति' के रूप में
चयन के परदे के पीछे मनोनीत ये सूचना आयुक्त अब अपना असली 'कुख्यात
व्यक्ति' रूप प्रदेश को दिखा रहे हैं जिसका दुष्परिणाम पूरा प्रदेश भुगत
रहा है lसंजय ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून की हत्या
किये जाने की इन परिस्थितियों में पारदर्शिता सम्बर्धन के लिए बचनबद्ध
संगठन 'तहरीर' मूकदर्शक बना नहीं रह सकता था और इसीलिये सामाजिक संगठन
'तहरीर' ने आने बाले 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी
औजार आरटीआई एक्ट के नौवें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में अपने बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण
मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह
03 बजे तक धरना-प्रदर्शन का आयोजन करने का निर्णय लिया था l


मेरा संगठन येश्वर्याज 12 अक्टूबर 2014 को धरना स्थल पर ही आरटीआई पर एक
जनसुनवाई और कैंप का आयोजन करने का निर्णय पूर्व में ही ले चुका था l
संजय की अपील पर मैंने उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता संवर्धन के लिए
कार्यरत अन्य प्रमुख सामाजिक संगठन से भी इस संक्रमणकाल में चुप नहीं
बैठने और 12 अक्टूबर 2014 को होने बाले धरना-प्रदर्शन में अपने बैनर के
साथ प्रतिभाग कर पारदर्शिता के प्रति अपनी वचनबद्धता सिद्ध करने के संजय
के प्रयास को मजबूती देने की अपील की थी जिसे मानकर ये संगठन अब इस धरने
में सामूहिक रूप से प्रतिभाग कर रहे हैं l



कार्यक्रम में कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव नई दिल्ली की ओर से
येश्वर्याज को निःशुल्क उपलब्ध कराई गयी आरटीआई गाइड का भी निःशुल्क
वितरण किया जायेगा l


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Rajajipuram,Lucknow-226017,Uttar Pradesh,India
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आरटीआई एक्ट के 9वें जन्मदिन पर सूचना आयोग के खिलाफ सामाजिक संगठन करेंगे प्रदर्शन

http://ipnlive.in/view_full_news.php?news_id=3878

आरटीआई एक्ट के 9वें जन्मदिन पर सूचना आयोग के खिलाफ सामाजिक संगठन करेंगे प्रदर्शन

Posted on: Oct 08, 2014 on 06:50:50 PM (IST)

लखनऊ(आईपीएन)। उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन
के विरोध में प्रदेश के बिभिन्न सामाजिक संगठनों ने आरटीआई एक्ट के नौवें
जन्मदिन पर 'तहरीर' नामक संस्था के साथ इकट्ठे होकर 12 अक्टूबर को
राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान स्थल पर धरना-प्रदर्शन करने का
निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम में येश्वर्याज सेवा संस्थान, एक्शन ग्रुप
फॉर राइट टु इनफार्मेशन, आरटीआई कॉउंसिल ऑफ यूपी, ट्रैप संस्था अलीगढ़,
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, मानव विकास सेवा समिति मुरादाबाद,
जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच, भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच, एसआरपीडी
मेमोरियल समाज सेवा संस्थान, ऑल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड
ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन आदि संगठन शिरकत कर रहे हैं।


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-Sincerely Yours,

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101,Narayan Tower, Opposite F block Idgah
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Monday, 6 October 2014

e-Invite :उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन का आयोजन

From facebook wall of Sanjay Sharmaji

https://www.facebook.com/sanjay.sharma.tahrir/posts/1539370056279480:0

उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में
सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान
धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन का आयोजन

'तहरीर' उत्तर प्रदेश स्थित सामाजिक संगठन है जो लोक जीवन में पारदर्शिता
संवर्धन, जबाबदेही निर्धारण और आमजन के मानवाधिकारों के संरक्षण के
हितार्थ उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर कार्यशील है l 'तहरीर' की कार्य
प्रणाली अन्य सामाजिक संगठनों से कुछ भिन्न है l 'तहरीर' का सूत्रवाक्य
"अपनी शक्ति आप" है और 'तहरीर' अपने सदस्यों की समस्याओं का हल करने को
उन सदस्यों को अन्य सामाजिक संगठनों की भाँति अपने पीछे-पीछे दौड़ाकर बार
बार अपने अग्रजनों की श्रेष्ठता दिखाने के बजाये सभी नागरिकों की
आत्मनिर्भरता के सिद्धांत पर कार्य करता है और हमारी कोर टीम अपने
सदस्यों को समुचित रूप से प्रशिक्षित कर उनको उनकी लड़ाई स्वयं ही लड़ने के
लिए तैयार करती है और उनको परदे के पीछे रहकर अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान
करते हुए विजयश्री दिलाती है l

आने बाले 12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई
एक्ट को लागू हुए 9 वर्ष पूरे हो रहे हैं l आज 'तहरीर' पारदर्शिता विंग
की सभा में यह निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के
निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में सामाजिक संगठन 'तहरीर' के बैनर तले
राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को
पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया जायेगा l

उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून के क्रियान्वयन की दुर्दशा के सम्बन्ध
में हमारे संगठन ने हाल ही में सूबे के राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित
किया था l आरटीआई एक्ट में सूचना आयोग की भूमिका एक्ट के संरक्षक की है
परन्तु दुर्भाग्य है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग आरटीआई एक्ट के संरक्षक
के स्थान पर एक्ट के प्राविधानों के क्रियान्वयन के मार्ग के विनाशक के
रूप में सामने आ रहा है l

नौ सूचना आयुक्त नियुक्त होने के बाबजूद 55000 से अधिक वादों का लम्वित
होना आयोग में व्याप्त दुर्व्यवस्थाओं का हाल स्वयं ही वयाँ कर रहा है l

नौ सालों में आयोग की नियमावली तक नहीं लागू हो पाई है l आयोग में लंबित
वादों की सुनवाई , नयी अपीलों और शिकायतों पंजीकरण और सुनवाई, आदेशों की
नक़ल देने आदि की कोई स्पष्ट एवं स्थापित व्यवस्था नहीं है l

अभी तक के कार्यकाल में वर्तमान सूचना आयुक्त अधिनियम के वाध्यकारी
प्राविधानों को समझने और क्रियान्वित कराने में पूर्णतया असफल रहे हैं और
सभी आयुक्तों द्वारा वादों की सुनवाई मनमाने ढंग से और अपनी व्यक्तिगत
सनक के आधार पर की जा रही है l हमारा दावा है कि उत्तर प्रदेश सूचना आयोग
का एक भी आदेश विधिक मापदंडों के अनुसार की गयी जांच में पास नहीं हो
पायेगा l

सूचना आयुक्त न तो अधिनियम और कानून जानते हैं और न ही बताने पर जानने का
प्रयास करते हैं l अधिकांश सूचना आयुक्त अधिनियम के तहत प्राप्त शिकायतों
का संज्ञान नहीं ले रहे हैं और इन शिकायतों को सरसरी तौर पर खारिज करने
का असंवैधानिक कार्य कर रहे हैं l 'तहरीर' के एक सदस्य के रूप में मैं
व्यक्तिगत रूप से अकेला ही एक साथ सभी आयुक्तों को अधिनियम के
प्राविधानों पर इन-कैमरा बहस हेतु खुली चुनौती दे रहा हूँ l

सूचना आयोग में बदहाली का आलम ये है कि बिना रिश्वत दिए आयोग के आदेशों
की नक़ल भी नहीं मिलती है l 30 दिन में सूचना देने के लिए बने एक्ट के तहत
आयोग में अपील करने पर 6 माह से 1 साल में सुनवाई का नंबर आता है और अगली
तारीखें भी 30 दिन से 6 माह तक की दी जा रही हैं l

सूचना आयुक्त नागरिकों और आरटीआई कार्यकर्ताओं से मिलने के कतई इच्छुक
नहीं हैं और आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा जनहित के लिए माँगी गयी सूचनाओं
पर दायर अपीलों की सुनवाइयों से पीछा छुड़ाने के लिए कार्यकर्ताओं को
सुनवाई में बेइज़्ज़त करने, उनके साथ बदसलूकी करने और यहाँ तक कि
कार्यकर्ताओं पर सरकारी कार्य में वाधा पंहुचाने की झूठी ऍफ़ आई आर लिखाने
जैसी पतित और तुच्छ हरकतें करने जैसी कारगुजारियां एक सोची समझी रणनीति
के तहत कर रहे हैं l कहना अनुचित न होगा की आयोग में सर्वत्र पूर्णतः
अराजकता व्याप्त है और सूचनार्थी यदि आयोग में है तो मानिए खतरे में है l

आयुक्तों द्वारा पारित आदेश लोकप्राधिकारियों की सुविधानुसार बदलने,
दण्डादेशों को असंवैधानिक रूप से बापस लेने जैसे कारनामों के चलते
'तहरीर' को यह कहने में गुरेज़ नहीं है कि 'विख्यात व्यक्ति' के रूप में
चयन के परदे के पीछे मनोनीत ये सूचना आयुक्त अब अपना असली 'कुख्यात
व्यक्ति' रूप प्रदेश को दिखा रहे हैं जिसका दुष्परिणाम पूरा प्रदेश भुगत
रहा है l

उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता कानून की हत्या किये जाने की इन
परिस्थितियों में पारदर्शिता सम्बर्धन के लिए बचनबद्ध संगठन 'तहरीर'
मूकदर्शक बना नहीं रह सकता है और इसीलिये सामाजिक संगठन 'तहरीर' आने बाले
12 अक्टूबर को पारदर्शिता संवर्धन के सबसे प्रभावी औजार आरटीआई एक्ट के
नौवें जन्मदिन पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन
के विरोध में अपने बैनर तले राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना
स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक
धरना-प्रदर्शन का आयोजन कर रहा है l

हमें विश्वास है कि उत्तर प्रदेश में पारदर्शिता संवर्धन के लिए कार्यरत
अन्य सभी सामाजिक संगठन भी इन तथ्यों से भली भाति परिचित होंगे एवं वे इस
संक्रमणकाल में चुप नहीं बैठेंगे और 12 अक्टूबर 2014 को होने बाले
धरना-प्रदर्शन में अपने बैनर के साथ प्रतिभाग कर पारदर्शिता के प्रति
अपनी वचनबद्धता सिद्ध करने के हमारे प्रयास को मजबूती अवश्य देंगे l

हमारी सभी सामाजिक संगठनों, नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से अपील है
कि वे इस धरने में अपने अपने बैनर के साथ सम्मिलित होकर पारदर्शिता
सम्बर्धन के हमारे प्रयास को और मजबूती प्रदान करें l

यदि किसी व्यवहारिक समस्या के चलते आप लखनऊ आकर हमारा साथ देने में
असमर्थ हों तो आप अपने शहर में ही इस विषय पर धरने का आयोजन कर इसकी
सूचना हमें मोबाइल 8081898081 या ई मेल tahririndia@gmail.com पर दे दें
ताकि हम अपनी मुहिम में आपकी सहभागिता के लिए आपको धन्यवाद ज्ञापित कर
सकें l

--
-Sincerely Yours,

Urvashi Sharma
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Friday, 3 October 2014

फेंकी गई बच्चियों को गोद लेने नहीं आते

फेंकी गई बच्चियों को गोद लेने नहीं आते
http://inextlive.jagran.com/beti-bachao-campaign-41782

http://inextepaper.jagran.com/347580/INEXT-LUCKNOW/30.09.14#page/6/2
- बच्चियों को अपने आशियाने में बसाने के लिए लोगों में उत्साह ही नहीं
- पिछले सात सालों में 55 बेटियां लावारिस हालत में मिलीं
lucknow@inext.co.in
LUCKNOW: शहर-ए-तहजीब में लड़कियों के लिए कोई जगह नही है. कभी कोई एक
दिन की लड़की गली में फेंक देता है तो कभी नवजात शिशु को कूड़े के ढेर
में रख देता है. इस शहर का रिकॉर्ड देखें तो पिछले सात सालों में ख्8
बच्चे और भ्भ् बच्चियां हेल्पलाइन में लाई गई. लड़कों को गोद लेने के लिए
तो कई लोग आगे आए लेकिन बच्चियों को अपने आशियाने में बसाने के लिए लोगों
में उत्साह ही नहीं है. यही वजह है कि आज भी कई बच्चियां चिल्ड्रेन
हेल्पलाइन में हैं और इस आस में हैं कि उन्हें कोई सहारा मिल सके.
बेटियों को नहीं आते हैं गोद लेने
बेटियों को गोद लेने के लिए लोगों में ज्यादा रिस्पांस नहीं आता है. हैरत
की बात यह है कि पिछले सात सालों में भ्भ् बेटियों को लावारिस हालत में
यहां लाया गया. उनके लिए गोद लेने वाले भी कम हैं. वैसे भी गोद लेने की
प्रक्रिया इतनी कठिन है कि उसी में करीब दो साल लग जाते है.
बेटियां नाम कर रही हैं रोशन
सोशल एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने बताया कि लोगों में अजीबोगरीब सोच है.
वह बेटियों को कमतर आंकते हैं. लेकिन ऐसा नही है. आज बेटियां देश का नाम
रोशन कर रही हैं. न जाने क्यों कुछ लोग बेटियों के पैदा होने पर अपने को
शर्मसार महसूस करते हैं लेकिन ऐसा कतई नहीं है. बेटियां आज समाज को रोशन
करी हैं.
न्यू बॉर्न बेबी की लिस्ट
साल- मेल- फीमेल
ख्007- भ्- म्
ख्008- फ्- क्7
ख्009- 9- क्क्
ख्0क्0- भ्- क्क्
ख्0क्क्- क्- म्
ख्0क्ख्- भ्- फ्
ख्0क्फ्- ख्- क्ख्,
कोई बाधा मेरी उड़ान को नहीं रोक सकती.
हां, मैं वो हूं जो बदलाव ला सकती हूं, न तो छेड़छाड़ और न ही कोई अपराध
मुझे रोता हुआ छोड़ सकता है, मैं दुनिया का सामना करने के लिए हर चुनौती
लेने को तैयार हूं.. मुझे पूरी तरह से यकीन है कि मैं एक दिन दुनिया में
बदलाव ला सकूंगी.
मैं बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत करने के लिए आई नेक्स्ट लाइव टीम का
तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं. पूरी दुनिया में सभी बेटियों को मेरा
प्यार. मेरा मानना है कि अब समाज ऐसे पुराने विचारों से कहीं आगे बढ़
चुका है, जिसमें लड़कियों को गूंगा पशु के सामान समझा जाता था. आज की
महिलाओं ने लगभग हर फील्ड में अपना दबदबा बनाया है और महिलाओं ने यह
साबित किया है कि अगर संचालन करने का अवसर मिले तो वह पुरुषों से कहीं
अधिक बेहतर हैं. ऐसी कोई भी क्षेत्र नहीं बचा है, जहां महिलाओं ने अपने
एक्सीलेंस को साबित नहीं किया हो. आज यही महिलाएं और बेटियां हमारे देश
का गौरव हैं और विकास की धारा के साथ हैं.. तो देश के कल्याण के लिए मौका
क्यों छोड़ना.. 'अकेली चलूंगी.. किस्मत से मिलूंगी.. अरे मुझे क्या
बेचेगा रुपैय्या..' इसलिए हम सभी यह संकल्प लें कि हम हमेशा बेटियों की
सुरक्षा करेंगे, जो हमारा कल हैं और याद रहे 'जहां संघर्ष नहीं है, वहां
शक्ति नहीं है..'
- अनम अख्तर,
हेड गर्ल, सेंट जोसेफ इंटर कॉलेज, राजाजीपुरम
लोग लड़के के लिए प्रार्थना करते हैं, न कि लड़की के लिए.. वे हमेशा
लड़के की इच्छा रखते हैं, न कि लड़की की. वे लड़के का होना ज्यादा बेहतर
मानते हैं, न कि लड़की का. लेकिन जब हम संपत्ति की बात करते हैं तो वे
मां लक्ष्मी को पूजते हैं, जब वे शिक्षा की बात करते हैं तो मां सरस्वती
को पूजते हैं. अब मुझे बताइये.. वे क्यों संकोच करते हैं, जब उनके परिवार
में देवी स्वरूप बेटी जन्म लेती है? कहा जाता है, 'यत्र नारी पूजयन्ते,
रमन्ते तत्र देवता'. तरह-तरह की परेशानियां झेलना लड़कियों की किस्मत
नहीं है. फिर भी उन पर रुढि़वादी विचार थोपे जाते हैं. यही मजबूरी है, जो
उन्हें हर आस्पेक्ट में अपने आपको प्रूव करना पड़ता है. मुझे गर्व है कि
मैं एक लड़की हूं.
- पूजा आहूजा,
क्ख्वीं-ए, सेंट जोसेफ
आई नेक्स्ट की इस मुहिम की जितनी सराहना की जाए वह कम है. समाज में कन्या
भू्रण हत्या एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई है. इसके लिये समाज के हर वर्ग
को एकजुट होना पड़ेगा.
चंदन लाल दीक्षित
अध्यक्ष
लखनऊ बार एसोसिएशन
बिना बेटियों के न घर पूरा होता है और न ही पीढि़यां आगे बढ़ती हैं. इस
हकीकत को जानने के बावजूद लोग बेटों की ललक में बेटियों की गर्भ में ही
हत्या करने पर उतारू हैं. आई नेक्स्ट की इस मुहिम को सलाम.
सुरेश पांडेय
महामंत्री
लखनऊ बार एसोसिएशन
हमेशा की तरह आई नेक्स्ट ने एक ज्वलंत मुद्दा उठाया है. बेटी बचाओ अभियान
वक्त की जरूरत है. अगर बेटी ही नहीं होगी तो मां नहीं होगी और अगर मां
नहीं होगी तो श्रृष्टि ही खत्म हो जाएगी.
आलोक द्विवेदी भाऊ
उपाध्यक्ष
लखनऊ बार एसोसिएशन
आज हर जगह बेटियां कामयाबी के झंडे गाड़ रही हैं. कल्पना चावला रही हों
या फिर सुनीता विलियम्स, इंदिरा नुई हो या किरण मजूमदार शॉ. इन जैसी तमाम
बेटियों की सफलता को देखने के बावजूद लोग अपनी मानसिकता बदलने को तैयार
नहीं जो कि शर्मनाक है.
कामिनी ओझा
संयुक्त मंत्री
लखनऊ बार एसोसिएशन
आई नेक्स्ट का अभियान बेटी बचाओ तारीफ के काबिल है. असलियत में जो लोग
कन्या भ्रूण हत्या करते हैं वह सिर्फ एक बेटी का कत्ल नहीं करते बल्कि
पूरी मानवता का कत्ल करते हैं. इसकी सजा भी बेहद कड़ी होनी चाहिये.
मारुत शर्मा
संयुक्त मंत्री
लखनऊ बार एसोसिएशन