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Tuesday, 13 September 2016

यूपी : उच्चतम न्यायालय पंहुची सूचना आयुक्तों के ‘अंडर द टेबल खेल”’ की शिकायत




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लखनऊ/13-09-16 Written by Socio Political News Desk

यूपी के सूचना आयोग में बीते दिनों एक समाचार वेबसाइट द्वारा किये गए स्टिंग ऑपरेशन के सार्वजनिक होने के बाद यूपी के सूचना आयुक्तों की मुश्किलें खासी बढ़तीं नज़र आ रही हैं. यूपी के आरटीआई कार्यकर्ता तो लम्बे समय से सूचना आयुक्तों पर घूस खाकर सुनवाई करने का आरोप लगाते हुए सुनवाइयों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग कर ही रहे थे कि इसी बीच एक समाचार वेबसाइट द्वारा यूपी के सूचना आयोग में बीते दिनों किये गए स्टिंग ऑपरेशन में सूचना आयुक्तों द्वारा ‘अंडर द टेबल खेल”’ करने की बात सामने आने से एक्टिविस्टों को सूचना आयुक्तों को निशाने पर लेने का एक और हथियार मिल गया है. एक्टिविस्टों ने मौके का फायदा उठाते हुए बिना कोई देरी किये इस स्टिंग पर आधारित समाचार के साथ अपना शिकायती पत्र  भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को लिखकर आरटीआई एक्ट की धारा 17 के अंतर्गत जांच कराने और दोषी सूचना आयुक्तों को पद से हटाने की मांग कर दी है.




यूपी में लम्बे समय से आरटीआई कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कर रही लखनऊ की फायरब्रांड समाजसेविका उर्वशी ने बताया कि उन्होंने आज उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को न्यूज़ वेबसाइट की पूरी खबर भेजते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में व्याप्त भ्रष्टाचार,अनियमितताओं,अधिनियम विरोधी कार्यप्रणाली और आरटीआई आवेदकों के उत्पीडन की जांच कराकर दोषियों को दण्डित कराने की मांग कर दी है.

 

 

 

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को लिखे पत्र में उर्वशी ने स्थिति को गंभीर बताते हुए लिखा है  ऐसी गंभीर स्थिति में आप इस समाचार में वर्णित अति गंभीर समस्याओं पर भ्रष्ट सूचना आयुक्तों आदि के खिलाफ कार्यवाही करने के नैतिक और विधिक उत्तरदायित्व से मुंह नहीं मोड़ सकते है l और “आरटीआई एक्ट को पंगु बनाने वाले और आयोग में अंडर द टेबल का खेल” चलाने वाले सूचना आयुक्तों को दण्डित करने की मांग की है.

                                                                                                                             

 

 

 



uउर्वशी ने बताया कि इस वेबसाइट ने उत्तर प्रदेश में आरटीआई एक्ट अपना मूल उद्देश्य पूर्ण रूप से खो चूका है, प्रदेश में अब यह एक्ट सूचना आयुक्तों की कमाई का साधन मात्र बनकर रह गया है”, “सरकारों ने सूचना आयुक्त पदों पर सरकार के हितेषी लोगो को बैठाना शुरू कर दिया और परिणामत: सरकार के हितेषी सूचना आयुक्तों ने आरटीआई एक्ट का मूल उद्देश्य ही समाप्त कर दिया। उत्तर प्रदेश में आरटीआई एक्ट पर सबसे बुरा असर हुआ। उत्तर प्रदेश में सूचना आयुक्त हीं भ्रष्ट सरकारी अधिकारयों के प्रतिनिधि बन बैठे” , आयुक्तों की कार्यप्रणाली ऐसी की आवेदक खुद ही हताश व निराश होकर अपने घर बैठ जाए। आयोग में आना ही छोड़ दे ताकि केस को समाप्त किया जा सके”, अंडर द टेबल के खेल को पुख्ता करते केस, भ्रष्ट जनसूचना अधिकारीयों की आयोग में सेटिंग का उदाहरण, उत्तर प्रदेश में आरटीआई मात्र छलावा”, “आर्थिक रूप से कमजोर आवेदक के बस की बात नहीं आयोग से सूचना प्राप्त कर पाना, नहीं आते आवेदक तो जनसूचना अधिकारीयों के पक्ष दे दिया जाता है फैसलाजैसी रिपोर्ट  लिखकर यूपी के आरटीआई कार्यकर्ताओं द्वारा सूचना आयुक्तों पर लम्बे समय से लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि कर दी है और इसीलिए अब उन्होंने इस समाचार के साथ एक बार फिर यूपी के भ्रष्ट आयुक्तों पर हमला बोल दिया है.

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Saturday, 10 September 2016

UP : Jawed Usmani becomes vulnerable to corruption charges after making public announcement on mass waiver of RTI penalties.







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लखनऊ /10 सितम्बर 2016/Written by Socio Political News Desk  

यूपी सीआइसी जावेद उस्मानी की मुश्किलें थमने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं. लगता हैं कि सूबे के आरटीआई कार्यकर्त्ता उस्मानी की हर गतिविधि पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए हैं और ये कार्यकर्त्ता  उस्मानी की किसी भी चूक पर उनको कटघरे में खड़ा करने का कोई भी मौका छोड़ना नहीं चाहते है. फिर चाहे वह उस्मानी का सूचना आयोग में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग न कराने का फैसला हो, आयोग में यौन उत्पीडन जांच समिति के गठन में देरी होने का मामला हो या कोई और मामला, आरटीआई एक्टिविस्ट हर मामले में सीआइसी को घेरते नज़र आ रहे हैं जानकारों की मानें तो सूबे के सूचना आयोग और एक्टिविस्टों के बीच की यह जंग अब सांप-नेवले की लड़ाई जैसी होती जा रहे है जिसमें कोई भी पक्ष न तो हार मानने को तैयार है और न ही पीछे हटने को हालिया मामला इसी सितम्बर माह में आरटीआई से जुड़ी एक चार दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ पर गोरखपुर में सीआइसी उस्मानी द्वारा दिए गए उदबोधन से सम्बंधित बताया जा रहा है जिसमें एक्टिविस्टों ने  उस्मानी पर भ्रष्टाचार करके राजकोष को क्षति पंहुचाने और कथनी-करनी में अंतर करने का अपराध करने का आरोप लगाते हुए उस्मानी को दण्डित कराने  की अर्जी उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को भेजी है
                                                                                                                                               

गोरखपुर से  प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र में छपी खबर को आधार बनाते हुए की गयी शिकायत की प्रति को एक्टिविस्टों ने भारत के राष्ट्रपति,उप राष्ट्रपति,प्रधान मंत्री, सूबे के मुख्य मंत्री,इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश समेत दर्जन भर प्राधिकारियों को भी भेजा है



आरटीआई कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कर रही वरिष्ठ समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि  संदर्भित  समाचार के अनुसार  उस्मानी ने आरटीआई के पुराने गुनहगारों को माफी देने की घोषणा की है और कहा है कि सूचना का अधिकार कानून के तहत एक दशक तक जानकारी और जुर्माना देने वाले ज्यादातर जन सूचना अधिकारियों (पीआईओ) पर अब कार्रवाई हो पाना मुमकिन नहीं है।  उर्वशी ने बताया कि आरटीआई एक्ट में दण्ड की माफी की कोई व्यवस्था नहीं है और जावेद उस्मानी इस प्रकार की घोषणा करने के लिए अधिकृत भी नहीं हैं । उर्वशी ने  उस्मानी की घोषणा को पूर्णतः अवैध  बताया और कहा कि  उस्मानी ने अपने व्यक्तिगत भ्रष्ट उद्देश्यों की पूर्ति के लिए  दण्डित जनसूचना अधिकारियों से घूस खाकर अपने पद के अधिकार क्षेत्र से परे जाकर आरटीआई एक्ट के तहत दण्डित जनसूचना अधिकारियों को अर्थदण्ड से माफी देने के सम्बन्ध में यह अवैध सार्वजनिक घोषणा की है जिससे राजकोष को आर्थिक क्षति कारित होने के कारण इस आपराधिक कृत्य की जांच आवश्यक है





उर्वशी की तरफ से भेजे गए इस पत्र में जावेद उस्मानी पर सीआइसी के पद की गरिमा को गिराते हुए असत्य कथन करने, उप्र सूचना का अधिकार नियमावली 2015 से पूर्व जुर्माना बसूली की कोई व्यवस्था नहीं होने के सम्बन्ध में  असत्य कथन करके पने पूर्ववर्ती सूचना आयुक्तों को अप्रत्यक्ष रूप से अक्षम कहने की साजिश करने, उप्र सूचना का अधिकार नियमावली 2015 के लागू होने के बाद जुर्माने की वसूली के सम्बन्ध में असत्य संभाषण करने और आरटीआई के सम्बन्ध में उस्मानी की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर होने के आरोप लगाते हुए इस आरोपों की जांच की मांग की गयी है





आरटीआई एक्सपर्ट उर्वशी के अनुसार आरटीआई एक्ट की धारा 17 के द्वारा उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और राज्यपाल को ही मुख्य सूचना आयुक्त के खिलाफ कार्यवाही करने की विधिक व्यवस्था की गयी है और इसीलिये अन्होने अपना यह शिकायती पत्र उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और सूबे के राज्यपाल को प्रेषित किया है





उस्मानी को दण्डित कराने और आरटीआई एक्ट के तहत दण्डित किये गए सभी जनसूचना अधिकारियों से अर्थदंड की बसूली कराते हुए इस सूचना को सार्वजनिक किये जाने की मांग करते हुए जांच के दौरान बुलाये जाने पर अपने आरोपों के साक्ष्य जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने की बात भी उर्वशी ने अपने पत्र में कही है




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