Sunday, 20 August 2017

एक्टिविस्ट्स का डेथ-वारंट बताते हुए केंद्र और UP की RTI नियमावलियों को जलाकर उठाई गई सुधार की मांग l






लखनऊ/20 अगस्त 2017

2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है ।  लखनऊ की समाजसेविका और सामाजिक संगठन ‘येश्वर्याज’ की सचिव उर्वशी शर्मा का मानना है कि केंद्र और राज्यों की सरकारें जब देश भर के आरटीआई कार्यकर्ताओं के द्वारा बनाए गए जनदबाब के चलते सीधे-सीधे आरटीआई एक्ट में बदलाव करके एक्ट को कमजोर करने के मंसूबों में सफल नहीं हो पाई तो उन्होंने बैकडोर से आरटीआई नियमावलियों की आड़ लेकर RTI एक्ट को कमजोर करने की साजिश रचना शुरू कर दिया है l यूपी के आरटीआई कार्यकर्ता साल 2015 से ही लगातार इस साजिश के शिकार हो रहे हैं और केंद्र की नई आरटीआई नियमावली लागू होने के बाद पूरा देश इस प्रशासनिक साजिश का शिकार होगा l बकौल तनवीर अहमद सिद्दीकी , इसीलिये इन  नियमावलियों के अधिनियम विरोधी प्राविधानों पर विरोध प्रदर्शित करने के लिए सामाजिक  संगठन ‘येश्वर्याज’ ने आगे आकर लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान स्थित धरना स्थल में  नियमावलियों की प्रतियाँ जलाकर धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया है और भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री, मुख्य केन्द्रीय सूचना आयुक्त तथा  यूपी के राज्यपाल,मुख्यमंत्री और  मुख्य सूचना आयुक्त को ज्ञापन भेजकर   इन  नियमावलियों के अधिनियम विरोधी प्राविधानों  को समाप्त करने की माग उठाई है l

धरने में शामिल राम स्वरुप यादव  का मानना है कि इन नियमावलियों में आरटीआई की अर्जी देने वाले की मौत की स्थिति में मामला बंद करने और आरटीआई की प्रक्रिया खर्चीली करने जैसे प्रस्ताव हैं। हरपाल सिंह ने सरकार की इस कोशिश को आरटीआई कानून को बैक डोर से कमजोर करने की साजिश बताते हुए आशंका व्यक्त की है कि  नए बदलावों से आरटीआई के तहत सूचना पाना मुश्किल हो जाएगा।

आरटीआई एक्सपर्ट ज्ञानेश पाण्डेय कहते हैं कि देश की जनता को सूचना पाने का अधिकार काफी जद्दोजहद के बाद हासिल हुआ, लेकिन अब आरटीआई नियमावलियों के नाम पर  आवेदक की मौत होने पर मामला बंद कर देने,आवेदन को अधिकतम 500 शब्दों में देने, आरटीआई की फीस बढाने, पोस्टल खर्च आबेदक पर डालने और आरटीआई अर्जी देने वाले के खिलाफ काउंटर अपील देने का प्राविधान लागू करने से इस एक्ट को लाने की मूल मंशा की ही हत्या हो जायेगी ।

आरटीआई नियमावली में व्हिसिलब्लोअर की सुरक्षा का कोई भी प्रावधान नहीं किये जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अधिवक्ता रुवैद कमाल किदवई  ने इन नियमावलियों को आरटीआई की धार को कमजोर करने वाला, नागरिकों के मुकाबले भ्रष्ट सरकारी अफसरों की ताकत को बढ़ावा देने वाला और आम लोगों के लिए आरटीआई की प्रक्रिया को मंहंगा और जटिल बनाने वाला बताया है।

धरने में आये आरटीआई कार्यकर्ता पुरुषोत्तम शुक्ल, होमेंद्र कुमार, अरविन्द शुक्ल और राजकिशोर यादव भी इस बदलाव से काफ़ी नाराज़ दिखाई दिए और सभी ने सरकार पर आरटीआई क़ानून को कमज़ोर करने का भी आरोप लगाया l कार्यकर्ताओं के अनुसार   सरकार की नीयत साफ़ नहीं है और  उसने आम जनता के लिए सूचना का अधिकार पाना मुश्किल कर दिया है l

धरने में आरटीआई एक्टिविस्ट शमीम अहमद,अधिवक्ता मनीष,आनंद प्रसाद आदि ने प्रतिभाग  किया l कार्यक्रम की आयोजिका समाजसेविका उर्वशी शर्मा ने बताया कि यदि 3 माह में उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उनका संगठन इस मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर विधिक उपचार लेकर भारत में आरटीआई आन्दोलन को मजबूती देने के क्षेत्र में अपना योगदान देने का प्रयास करेगा  l


Saturday, 27 May 2017

UP : राज्यपाल से भेंटकर RTI activists ने उठाई जनपदीय न्यायालयों में RTI एक्ट लागू करने की मांग l




Lucknow/27 May 2017

बीते कल शाम यूपी के आरटीआई कार्यकर्ताओं के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ की समाजसेविका उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में यूपी के राजभवन जाकर यूपी के राज्यपाल राम नाईक  से भेंट की और उन्हें यूपी के जनपदीय न्यायालयों द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के प्राविधानों का अनुपालन न किये जाने के प्रमाण सौंपते हुए महामहिम से हस्तक्षेप  कर समस्या का समाधान करने की गुहार लगाई l  प्रतिनिधिमंडल ने मिर्जापुर के आरटीआई कार्यकर्ता मनीष कुमार सिंह के उत्पीड़न का प्रकरण भी राज्यपाल के समक्ष रखा और मनीष का उत्पीड़न करने वाले गौतम बुद्ध नगर के जिला जज अनिरुद्ध सिंह के खिलाफ कार्यवाही की मांग की l


प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं समाजसेविका और सामाजिक संस्था 'येश्वर्याज' की सचिव उर्वशी शर्मा ने बताया कि आरटीआई कार्यकर्ता मनीष ने उत्तर प्रदेश के सभी जनपदीय न्यायालयों को पत्र लिखकर आरटीआई एक्ट की धारा 4 के बाध्यकारी प्राविधानों को  लागू  करने की मांग की थी l इसके बाद गौतमबुद्ध नगर के जिला जज द्वारा मनीष का उत्पीड़न शुरू कर दिया गया था |बकौल  उर्वशी  इसके बाद मनीष द्वारा राज्यपाल को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई जिस पर राजभवन ने मनीष की समस्या के समाधान के लिए राजयपाल से मिलने की सूचना दी और वे राम नाईक से मिले l उर्वशी ने बताया कि उन्होंने उच्च न्यायालय की अपील प्रक्रिया नियमावली बनाने की मांग भी उठाई है l


उर्वशी ने बताया कि राजयपाल ने प्रतिनिधिमंडल के 8 सूत्री ज्ञापन पर लगभग आधे घंटे तफ्सील से बात की और ज्ञापन अपने मुख्य सचिव के मार्फत सूबे के  मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी को भेजते हुए उत्तर प्रदेश के सभी जनपदीय न्यायालयों द्वारा आरटीआई एक्ट की धारा 4 के बाध्यकारी प्राविधानों को  लागू  कराने और गौतमबुद्ध नगर के जिला जज द्वारा मनीष का कथित रूप से उत्पीड़न किये जाने की जाँच कराकर जांच रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष कार्यवाही कराने में हर संभव मदद का आश्वासन दिया है l

प्रतिनिधिमंडल में पीड़ित आरटीआई कार्यकर्ता  मनीष और उनके छोटे भाई के साथ लखनऊ के मानवाधिकार कार्यकर्ता इं. संजय शर्मा, एडवोकेट  रुवैद किदवई और तनवीर अहमद सिद्दीकी भी शामिल थे l

उर्वशी ने राज्यपाल को नई दिल्ली की संस्था कामनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव द्वारा उनकी संस्था 'येश्वर्याज' को निःशुल्क वितरण के लिए दी गई हिंदी और अंग्रेजी की RTI गाइड भेंट की जिसे सहर्ष स्वीकार करते हुए नाईक ने आरटीआई को पारदर्शिता और जबाबदेही को लोकजीवन का आवश्यक अंग बताते हुए   RTI गाइड्स को अपने जीवन की महत्वपूर्ण भेंटों में से एक भेंट बताया l


Wednesday, 17 May 2017

UP : दागी IAS सदाकांत की राह कितनी मुश्किल करेगी एक्टिविस्ट उर्वशी की यह PIL?



लखनऊ / 17 मई 2017
यूपी के अपर मुख्य सचिव आई.ए.एस. सदाकांत सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद भी मलाईदार माने जाने वाले लोक निर्माण विभाग के साथ-साथ आवास एवं शहरी नियोजन के मुखिया के पदों पर काबिज हैं l अंदरखाने खबरें आती रही हैं कि सदाकांत सूबे की नौकरशाही की सबसे ऊंची कुर्सी पर काबिज होने के  लिए जबरदस्त सियासी जोड़-तोड़ और पूजा-पाठ में लगे हुए हैं l पर इसी बीच लखनऊ से एक ऐसी खबर आ रही है जो अगर यूपी के सीएम योगी तक पहुँच गई तो न केवल सदाकांत के मुख्य सचिव की कुर्सी के पास पहुँचने के मंसूबों पर पानी फेर सकती है बल्कि सदाकांत को उनके वर्तमान के दोनों मलाईदार पदों से दूर भी कर यूपी की नौकरशाही में किनारे भी लगा सकती है l


बीजेपी संगठन उत्तर प्रदेश की आरटीआई सेल की पूर्व प्रदेश उप-प्रभारी और लखनऊ की नामचीन समाजसेविका एवं आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने आरटीआई से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर सदाकांत पर जालसाजी से सरकारी आवास आबंटन करा लेने के आपराधिक मामले में कार्यवाही कराने के लिए बीते सोमवार को अपने अधिवक्ता त्रिभुवन कुमार गुप्ता के मार्फत एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में दायर की है l


उर्वशी के अधिवक्ता त्रिभुवन कुमार गुप्ता ने बताया कि जनहित याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि राज्य सरकार को निर्देशित किया जाए कि वह सूबे के सभी पुलिस थानों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार में  निर्धारित किये गए कानून का और भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को दिए निर्देशों का  अक्षरशः अनुपालन कराने की प्रणाली विकसित करे और पुलिस थानों पर प्राप्त संज्ञेय अपराध के प्रत्येक मामले में बिना किसी भेद-भाव के शीघ्रता से ऍफ़.आई.आर. दर्ज कराये और संज्ञेय अपराध प्रकट होने पर भी ऍफ़आईआर दर्ज न करने पर सम्बंधित पुलिस कार्मिकों के खिलाफ कार्यवाही करे l


गुप्ता के अनुसार जनहित याचिका में लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  और थाना हजरतगंज के थाना प्रभारी द्वारा सदाकांत के आपराधिक कृत्यों पर कानूनी कार्यवाही करने के स्थान पर सदाकांत का अपराध छुपाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  और थाना प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग भी की गई है l
    



सदाकांत को साल 2011 में बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन में तैनाती के दौरान भारत की सुरक्षा से सम्बंधित दस्तावेज लीक कर किये गये 200 करोड़ के घूसकांड का मास्टरमाइंड बताते हुए उर्वशी ने बताया कि उनको विश्वास है कि वे उच्च न्यायलय से सदाकांत को उसके किये की सजा दिलवाकर यूपी को सदाकांत सरीखे भ्रष्ट और जालसाज नौकरशाहों से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ सूबे के सभी थानों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाकर नए सीएम योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस तो करप्शन’ की मुहिम को परवान चढ़ाने में एक सजग नागरिक के रूप में अपना समुचित योगदान देने में कामयाब अवश्य होंगी l 

Saturday, 13 May 2017

यूपी : खलनायक बने राजधानी प्रशासन ने नहीं दी येश्वर्याज RTI क्लीनिक की अनुमति l

यूपी : खलनायक बने राजधानी प्रशासन ने नहीं दी येश्वर्याज RTI क्लीनिक की अनुमति l


कैंप अब लखनऊ के हजरतगंज जीपीओ स्थित महात्मा गांधी पार्क के स्थान पर  बर्लिंगटन चौराहे के पास स्थित प्रवीण पेट्रोल पम्प के सामने कैंट रोड स्थित ग्रान्ड मार्किट ( निकट सिटी साइबर कैफ़े) पर स्थित कार्यालय में होगा
 

Friday, 12 May 2017

‘येश्वर्याज RTI क्लीनिक’ का उद्घाटन, RTI जन जागरूकता अभियान 2017 और CHRI,नई दिल्ली की RTI गाइड का निःशुल्क वितरण

‘येश्वर्याज RTI क्लीनिक’ का उद्घाटन,
RTI जन जागरूकता अभियान 2017 और
CHRI,नई दिल्ली की RTI गाइड का निःशुल्क वितरण   
दिनांक : 14 मई 2017 दिन :  रविवार
समय : पूर्वाहन 11 बजे से 5 बजे अपराह्न तक
स्थान : हजरतगंज GPO के निकट स्थित महात्मा गाँधी पार्क 
-: आयोजिका :-
उर्वशी शर्मा ( समाजसेविका एवं RTI एक्टिविस्ट )
मोबाइल नंबर  9369613513 Whatsapp No. 8081898081
-: संसाधन व्यक्ति :-
डा. नीरज कुमार, डा. आलोक चांटिया, इं. संजय शर्मा, रुवैद कमाल किदवई ( अधिवक्ता ),त्रिभुवन कुमार गुप्ता ( अधिवक्ता ),सौरभ यादव ( अधिवक्ता ) , मनीष त्रिपाठी ( अधिवक्ता ), अशोक कुमार शुक्ला ( अधिवक्ता ), मनीष कुमार सिंह ( अधिवक्ता ) , शमीम अहमद
-: सहयोगी संगठन :-
कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव,नई दिल्ली;सूचना का अधिकार बचाओ अभियान ट्रस्ट,लखनऊ और एस.आर.पी.डी. मेमोरियल समाज सेवा संस्थान,लखनऊ    
RTI Helpline : 8081898081    RTI Helpmail :  upcpri@gmail.com
Blog : http://upcpri.blogspot.in/  Twitter @yaishwaryaj Instagram @yaishwaryaj









Friday, 21 April 2017

CPRI के प्रतिनिधिमंडल ने गवर्नर से भेंट कर की आयुक्तों की शिकायत, गवर्नर ने दिया कार्यवाही का आश्वासन l


लखनऊ/ 21-04-17
आरटीआई के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्था ‘सूचना का अधिकार बचाओ अभियान’ CPRI ट्रस्ट के 8 सदस्यीय प्रतिनिदिमंडल ने आज शाम यूपी के राज्यपाल राम नाईक से भेंट की और यूपी के सूचना आयुक्तों की शिकायत करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में व्याप्त अनियमितताओं को दूर कराकर आरटीआई आवेदकों की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की l CPRI की संरक्षिका समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी ने बताया कि राज्यपाल ने आधे घंटे से अधिक की बातचीत में संस्था द्वारा उठाये गये बिन्दुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया और मांगपत्र के बिन्दुओं के विषयों पर यथावश्यक व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर कार्यवाही का आश्वासन भी दिया l

बताते चलें कि ‘सूचना का अधिकार बचाओ अभियान’ एक पंजीकृत ट्रस्ट है जो सम्पूर्ण भारत में ‘सूचना का अधिकार अधिनियम 2005’ के प्रचार प्रसार के लिए और आरटीआई प्रयोगकर्ताओं की समस्याओं को आगे लाकर उनका समाधान कराने के लिए प्रयासरत है l


CPRI के राष्ट्रीय अध्यक्ष तनवीर अहमद सिद्दीकी ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में अनेकों अनियमितताएं व्याप्त हैं जिनके सम्बन्ध में संस्था द्वारा किये गये पत्राचार को राज्यपाल सचिवालय ने उत्तर प्रदेश शासन के प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा था किन्तु पूर्व की सरकार द्वारा इन प्रस्तावों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई थी l




राज्यपाल महोदय को दिये गये ज्ञापन के माध्यम से उठाई गयी संस्था की प्रमुख 7 मांगें निम्नवत हैं :


1-  उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्तों द्वारा खुली सुनवाईयां नहीं की जा रहीं हैं l सुनवाईयों की प्रतिदिन की समयसारिणी का अनुपालन सुनिश्चित कराने और सुनवाइयों को भयमुक्त, प्रताड़नामुक्त, निष्पक्ष और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के लिए सभी सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा बहाल कराई जाए l
2-  सूचना आयुक्तों, सचिव, रजिस्ट्रार, उप सचिव आदि अधिकारियों के कार्यालय कक्षों के साथ-साथ आयोग के सभी अन्य कार्यालय-कक्षों में घूस लेकर बिना बारी काम कर देना,घूस न मिलने पर काम न करना और जनमानस के साथ दुर्व्यवहार करना आम होता जा रहा है l  इस समस्या के समाधान के लिए आयोग के सभी कार्यालयों  में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा शुरू कराई जाए l
3-  सूचना आयुक्तों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और उत्तर प्रदेश आरटीआई नियमावली 2015 के विधिक प्राविधानों का अनुपालन करने से सम्बंधित सम्यक ज्ञान न होने के कारण सूचना आयोग में दर्ज मामलों का निस्तारण अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप ससमय नहीं हो पा रहा है जिसके कारण एक तरफ सूचना आयोग में लंबित मामलों की संख्या में कमी नहीं आ पा रही है तो वहीं दूसरी तरफ मामलों के लम्बा खिंचने के कारण आरटीआई आवेदकों की हत्याओं/प्रताड़ना के मामले बढ़ते जा रहे हैं l इस समस्या के समाधान के लिए सूचना आयुक्तों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 और उत्तर प्रदेश आरटीआई नियमावली 2015 के विधिक प्राविधानों के अनुपालन से सम्बंधित प्रशिक्षण दिलाया जाए ताकि आयोग में आये प्रकरणों का ससमय सम्यक निस्तारण हो सके l

4-  आयोग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 22 का अनुपालन नहीं किया जा रहा है और आयोग के अभिलेख सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत नहीं दिये जा रहे हैं l धारा 22 के अनुपालन में आयोग के अभिलेखों की सत्यापित प्रतियाँ सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्रदान कराई जाएँ l
5-  आयोग में दर्ज शिकायतों और अपीलों के आदेशों की सत्यापित प्रतियाँ सुनवाई के दिनांक के 15 दिन के अन्दर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कराते हुए आदेश को पंजीकृत डाक के माध्यम से आरटीआई आवेदक को भेजा जाए l
6-  सूचना आयुक्तों, सचिव, रजिस्ट्रार, उप सचिव आदि अधिकारियों के कार्यालय कक्षों के साथ-साथ आयोग के अन्य सभी कार्यालय-कक्षों में पत्र / आपत्ति पत्र / आदेशों की नकल के प्रार्थना पत्रों की प्राप्ति कर मुहर/मुद्रा के साथ पावती देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए l
7-  सूचना आयुक्तों द्वारा देर से सुनवाई शुरू करने / अचानक अवकाश पर चले जाने / अचानक किसी अन्य शासकीय कार्य पर जाने की सूचना तत्काल आयोग की वेबसाइट पर प्रदर्शित करते हुए सूचना एस.एम.एस. और ई-मेल द्वारा आरटीआई आवेदकों को तत्काल दिया जाना शुरू किया जाए l 


CPRI के प्रतिनिधिमंडल में उर्वशी शर्मा और तनवीर अहमद सिद्दीकी के साथ CPRI के मुख्य विधिक सलाहकार रुवैद कमाल किदवई भी उपस्थित रहे l

राज्यपाल से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में समाजसेवी सफीर सिद्दीकी, सुरेश शर्मा, मोहम्मद अमीन, नीलम गौतम  और संजय शर्मा भी शामिल थे l  






Wednesday, 19 April 2017

UP: गधे के साथ धरना दे कल राजधानी में सूचना आयुक्तों का विरोध करेंगे RTI एक्टिविस्ट l

लखनऊ/19-04-17
भारत में सूचना का अधिकार यानि कि पारदर्शिता का कानून लागू हुए 11 साल से भी ज्यादा हो गये हैं l इस कानून को लागू करते समय भारत की संसद ने ये नहीं सोचा होगा कि कभी ऐसा दिन भी आएगा जब उनके द्वारा पारदर्शिता के इस कानून में नियत की गई संरक्षक की भूमिका को निभाने के लिए नियुक्त होने वाले सूचना आयुक्तों के पदों पर ऐसे-ऐसे लोग नियुक्त हो जायेंगे कि उनका विरोध करने के लिए एक्टिविस्टों को गधों के साथ सड़क पर आकर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग बुलंद करने पड़ेगी l पर आज स्थिति ऐसी हो गई है कि आरटीआई एक्टिविस्टों को उत्तर प्रदेश के सूचना आयुक्तों का विरोध करने के लिए लखनऊ की समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में इकट्ठा होकर गधे के साथ धरना देना पड़ रहा है l

एक्टिविस्ट उर्वशी ने बताया कि संसद ने आरटीआई कानून को एक अत्यंत ही पवित्र उद्देश्य की पूर्ति के  लिए पारित किया था l उर्वशी ने कहा कि आरटीआई एक्ट की प्रस्तावना में ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस जानने के अधिकार का प्रयोग करें और गवर्नेंस में सहभागिता कर लोकतंत्र को मजबूती दें परन्तु जब कोई नागरिक आरटीआई का प्रयोग कर कानून को पारित करने की मंशा के अनुसार अपने दायित्व का निर्वहन करता है तो जन सूचना अधिकारी से लेकर सूचना आयुक्त तक सभी उसे दुश्मन की निगाह से देखने लगते हैं l

उर्वशी ने बताया कि आरटीआई कानून में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए व्यक्ति में व्यापक ज्ञान और अनुभव के साथ-साथ समाज के प्रख्यात होना भी आवश्यक किया गया है पर सूबे की अखिलेश सरकार ने इन पदों पर अज्ञानी,अनुभवहीन और सामान्य समझ तक न रखने वाले व्यक्तियों को नियुक्त करके सूबे में आरटीआई कानून को मृतप्राय अवस्था में पहुंचा दिया है l उर्वशी ने वर्तमान आयुक्तों की नियुक्तियों को राजनैतिक नियुक्ति बताया है l

बकौल उर्वशी क्योंकि अब सूबे में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और सूबे के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे में कानून का राज स्थापित करने के लिए कृतसंकल्प हैं इसीलिये उन्होंने सीएम योगी के ध्यानाकर्षण के लिए कल 20 अप्रैल को गधे के साथ इस धरने का आयोजन इस आशय से किया है कि योगी यूपी के राज्यपाल द्वारा सूचना आयुक्तों के खिलाफ कार्यवाही के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग भेजे गये 303 मामलों को सुप्रीम कोर्ट भिजवाकर वर्तमान सूचना आयुक्तों के खिलाफ एक्ट की धारा 17 की दंडात्मक कार्यवाही करायेंगे और सूचना आयोग में खाली पड़े दो पदों पर आरटीआई कानून का व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले  समाज के प्रख्यात व्यक्तियों की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पारदर्शी रीति से करेंगे l

उर्वशी ने बताया कि कल वे अपने साथियों के साथ उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ‘आरटीआई भवन’ विभूतिखंड गोमतीनगर,लखनऊ के मुख्य द्वार के बाहर की सड़क के डिवाइडर पर मुख्य द्वार के सामने पूर्वाह्न 11:00 बजे से 12:00 बजे दोपहर तक;लक्ष्मण मेला मैदान, धरना स्थल, लखनऊ अपराह्न 01:00 बजे से 03:00 बजे अपराह्न तक और लखनऊ के जिलाधिकारी आवास के सामने, सड़क के दूसरी ओर रवीन्द्र नाथ टैगोर की मूर्ति के सामने   - 04:00 बजे से 05:00 बजे अपराह्न तक धरना प्रदर्शन कर जिला प्रशासन के माध्यम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और यूपी के राज्यपाल, सीएम को ज्ञापन भी भेजेंगी  l





Monday, 17 April 2017

UP - उर्वशी शर्मा ने IPS अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर पर लगाए गंभीर आरोप : थाना विभूतिखंड में दी FIR की तहरीर



लखनऊ / 17-04-17
लखनऊ की एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर पत्नी अमिताभ ठाकुर को आपराधिक प्रवृत्ति की दंपत्ति बताते हुए ठाकुर  दंपत्ति पर उच्च आई.पी.एस. पद की आड़ में फर्जी एन.जी.ओ. बनाकर इन्टरनेट और सोशल मीडिया पर उनका प्रचार कर भोले भाले लोगों को बेबकूफ बनाकर धनउगाही करने, मानहानि और चरित्रहनन करने, संपत्तियों पर अवैध कब्ज़ा करने,आधा दर्जन एनजीओ बनाकर धन ऐंठने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए ठाकुर दंपत्ति के खिलाफ FIR लिखाने की तहरीर राजधानी के थाना विभूतिखंड में दी है l

उर्वशी ने अपनी तहरीर में अमिताभ ठाकुर को एक शातिर व्यक्ति बताते हुए ठाकुर पर भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे धन-उगाही करने के लिए समय-समय पर तरह-तरह के झूठे प्रपंच करने और ऐसा करने के लिए ये जानबूझकर झूंठे दस्तावेजों की रचना का आरोप भी लगाया है l

उर्वशी ने ठाकुर दंपत्ति को शातिर बताते हुए इनके द्वारा न्यायिक और अर्ध न्यायिक संस्थाओं की सुनवाइयों में अपने साथ स्पाई-कैमरे और छुपी हुई ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लेकर जाने और जासूसी से छुपकर सुनवाई की पूरी रिकॉर्डिंग कर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों तक के आदेशों पर टिप्पणियां करके उनको खुलेआम ललकारने का आरोप भी लगाया है l

अमिताभ ठाकुर द्वारा महात्मा गाँधी और महिलाओं पर सेक्स से सम्बंधित सार्वजनिक टिप्पणियों को महात्मा गांधी और महिलाओं के वारे  मानहानिकारक बताते हुए ठाकुर की टिप्पणियों से उनकी भावनाएं आहत होने की बात भी उर्वशी ने अपनी तहरीर में लिखी है l

अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर द्वारा गंभीर प्रकृति के संज्ञेय अपराध करने की बात लिखते हुए उर्वशी ने थानाध्यक्ष से सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 12-11-13 को ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2014) 2 एससीसी 1 में पारित निर्णय के अनुपालन में प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध होने की बात सामने आने के कारण ऍफ़आईआर दर्ज कर विवेचना कर साक्ष्य संकलन कर मामले का विधिक निस्तारण करने का अनुरोध किया है l  

Tuesday, 11 April 2017

जालसाज है यूपी का अपर मुख्य सचिव सदाकांत शुक्ला : उर्वशी शर्मा

समाचार सार : पारदर्शिका, जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत देश की नामचीन समाजसेविकाओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं में शुमार की जाने वाली लखनऊ की एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने अपनी आरटीआई के माध्यम से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर यूपी के लोक निर्माण विभाग तथा आवास एवं शहरी नियोजन जैसे दो महत्वपूर्ण महकमों में  अपर मुख्य सचिव के पद पर काम कर रहे आईएएस  सदाकांत शुक्ल पर जालसाजी कर सरकारी आवास हथियाने का आरोप लगाते हुए सदाकांत के खिलाफ  जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में ऍफ़.आई.आर. दर्ज कराने की तहरीर बीते 9 अप्रैल को थाना हज़रतगंज में दी है l

To download otiginal letter as given to SHO Hazratganj alongwith all attachments, please click this weblink http://upcpri.blogspot.in/2017/04/l_10.html

लखनऊ / 11-04-17
यूपी को अगर आबादी के हिसाब से देखा जाए तो यह भारत का सबसे बड़ा सूबा है l अगर कोई आपसे कहे कि इस यूपी की 20 करोड़ से अधिक की आबादी को आवास यानि कि मकान मुहैया कराने की कमान पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक ऐसे अधिकारी के हाथ में दी हुई थी जिसने साल 2011 में राज्य का सरकारी  आवास हथियाने के लिए जालसाजी का सहारा लिया था तो शायद आपको यकीन न हो पर पारदर्शिका, जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत देश की नामचीन समाजसेविकाओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं में शुमार की जाने वाली लखनऊ की एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा को आरटीआई के माध्यम से जो रिकॉर्ड मिला है उससे पूरी तरह सिद्ध हो रहा है कि IAS सदाकांत शुक्ल ने साल 2011 में समाज कल्याण, डा. अम्बेडकर ग्राम सभा विकास,महिला कल्याण और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के प्रमुख सचिव के पद पर काम करते हुए सरकारी आवास हथियाने की साजिश के लिए जालसाजी और कूटरचना का अपराध करने से भी गुरेज़ नहीं किया l

उर्वशी ने उत्तर प्रदेश के वर्तमान अपर मुख्य सचिव सदाकांत के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही करने की मांग वाली तहरीर बीते 9 अप्रैल को थाना हजरतगंज में दे दी है l

बकौल उर्वशी उत्तर प्रदेश के राज्य संपत्ति विभाग ने उनको आरटीआई के तहत जो कागजात दिये हैं उनसे यह सामने आ रहा है कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान अपर मुख्य सचिव सदाकांत ने राज्य संपत्ति विभाग का सरकारी आवास नियम विरुद्ध रीति से आबंटित कराने के लिए शातिराना ढंग से कूटरचित पत्र बनाकर कूटरचित पत्र को असली की तरह प्रयोग किया और राज्य सरकार की आँखों में धूल झोंककर धोखाधड़ी से सरकारी मकान हथिया लिया l 

उर्वशी के अनुसार सदाकांत सरकारी आवास हथियाने के लिए झूंठ बोला कि लखनऊ में उसका कोई निजी आवास नहीं था और इसी आधार पर उसने राज भवन कॉलोनी,दिलकुशा कॉलोनी अथवा अन्य किसी कॉलोनी में सरकारी आवास पर अपना दावा ठोंका जबकि सदाकांत ने साल 2011 और 2012 में भारत सरकार को अचल संपत्तियों का जो विवरण दिया था उसके अनुसार लखनऊ के कुर्सी रोड स्थित विकास नगर कॉलोनी में लगभग 50 लाख कीमत का MIG मकान नंबर 2/29 सदाकांत के अपने नाम में था जो सदाकांत द्वारा अपने निजी इस्तेमाल में लाया जा रहा था l

उर्वशी ने बताया कि लखनऊ के विकास नगर कॉलोनी स्थित मकान होते हुए भी सदाकांत द्वारा  असत्य अभिकथन करके कूटरचना द्वारा पत्र तैयार किया गया और इस कूटरचित पत्र को उत्तर प्रदेश शासन के राज्य संपत्ति अधिकारी को भेज इस कूटरचित पत्र के आधार पर आवास आबंटन नियमावली 1980 के नियम 23 के अंतर्गत नियमों में शिथिलता प्राप्त कर राज्य संपत्ति विभाग के आवास का आबंटन करा कर 3 दिन में ही सरकारी मकान पर  काबिज भी हो गया l उर्वशी के अनुसार कूटरचना कर तैयार पत्र के आधार पर बेईमानी और फर्जीबाड़े से सरकार की संपत्ति प्राप्त करने का यह गंभीर संज्ञेय अपराध सदाकांत ने भली भांति यह जानते हुए कि वह अपराध कर रहा है , किया l उर्वशी ने सदाकांत के अपराध को  ठन्डे दिमाग से सोच-समझकर कारित किया गया अपराध बताया है l  

उर्वशी ने अपनी तहरीर में सदाकांत के आपराधिक कृत्य को भारतीय दंड संहिता की धारा 420,467,471 और  भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कारित किये गये गंभीर प्रकृति का संज्ञेय अपराध बताया है और थाना हजरतगंज के थाना प्रभारी से सुप्रीम कोर्ट द्वारा ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार में पारित निर्णय और भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को ऍफ़.आई.आर. लिखने के सम्बन्ध में प्रेषित निर्देशों का अनुपालन करते हुए सदाकांत के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही करने की मांग की है l


Saturday, 8 April 2017

UP : अखिलेश के ‘गधों’ से नाखुश समाजसेवी ‘गधे’ संग धरना दे योगी से करेंगे मोदी के ‘गधों’ की माँग l

लखनऊ / 08-04-17
लगता है यूपी में हालिया संपन्न हुए विधान सभा चुनावों में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ‘गधों’ को लेकर हुई बहुचर्चित ज़ुबानी जंग की आबाजें सूबे की फिजाओं में अभी तक गूँज रही हैं l तभी तो यूपी के समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने आने वाले 20 अप्रैल को समाजसेविका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में राजधानी लखनऊ में गधे के साथ 3 स्थानों पर धरना देकर एक अनोखे अंदाज में अपनी मांगें उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और सूबे के नए सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने रखने का ऐलान किया है l

इस अनोखे धरने के वारे में बात करते हुए उर्वशी शर्मा ने बताया कि विगत चुनावों के दौरान देश के पीएम मोदी ने गधे की वफादारी की बहुत चर्चा की थी । उन्होंने कहा कि गधा अपने मालिक का वफादार होता है। गधा कितना ही बीमार हो, भूखा हो, थका हो लेकिन अगर मालिक उससे काम लेता है तो सहन करता हुआ भी अपने मालिक का दिया काम पूरा करके रहता है। मोदी ने यह भी कहा था कि सवा सौ करोड़ देशवासी उनके मालिक हैं। वो उनसे जितना काम लेते हैं, वे करते हैं  थक जाएँ तो भी करते हैं  क्योंकि वे गधे से गर्व के साथ प्रेरणा लेते हैं ।प्रधानमंत्री ने कहा था अगर खुले दिमाग से देखो तो गधा भी प्रेरणा देता है। खर्च भी कम करता है। गधा भेदभाव नहीं करता चाहे उसकी पीठ पर चीनी हो या चूना। पीएम ने खुद को सबसे बड़ा गधा माना था l

धरने का बैनर जारी करते हुए उर्वशी ने बताया कि ये धरना पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में नियुक्त किये गये वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त और सभी वर्तमान सूचना आयुक्तों के खिलाफ है जिनमें कार्यों के प्रति वफादारी की कमी है , अपने मालिक अर्थात देश के नागरिकों के प्रति वफादारी की कमी है ,कार्य समय में पदीय कार्य न करके व्यक्तिगत कार्य करने की आदत है , अपने मालिक अर्थात देश के नागरिकों का दिया काम पूरा न करने की आदत है ,राजकोष से अनाप-शनाप खर्चे करने की आदत है ,अधिकतर बिना बताये छुट्टी पर रहने की आदत है और कार्य करते समय भेदभाव करने की भी आदत है l

बकौल उर्वशी अखिलेश यादव द्वारा नियुक्त सूचना आयुक्तों में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बताये गये गधे के अच्छे गुणों में से एक एक भी अच्छे गुण के न होने के कारण आयोग आने वाले पूरे सूबे के आरटीआई कार्यकर्ता और प्रयोगकर्ता व्यथित हैं और इसीलिये उन्होंने आगामी 20 अप्रैल को लखनऊ में 3 स्थानों उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ‘आरटीआई भवन’ विभूतिखंड गोमतीनगर,लखनऊ के मुख्य द्वार के बाहर की सड़क के डिवाइडर पर मुख्य द्वार के सामने; जिलाधिकारी आवास के सामने, सड़क के दूसरी ओर रवीन्द्र नाथ टैगोर की मूर्ति के सामने और लक्ष्मण मेला मैदान, धरना स्थल, लखनऊ पर एक जीवित गधे के साथ एक  धरने का आयोजन कर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में रिक्त पड़े सूचना आयुक्तों के 2 पदों पर देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्णित गधे के गुणों वाले सूचना आयुक्तों का चयन नमित शर्मा मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट की गई प्रक्रिया के अनुसार पारदर्शी रीति से करने की मांग बुलंद करने के लिए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन भेजने का फैसला किया है  l