Friday, 22 December 2017

RTI एक्टिविस्ट उर्वशी शर्मा ने UP सूचना आयोग को दिया CIC की तर्ज पर वार्षिक अधिवेशन बुलाने का प्रस्ताव l

     




लखनऊ/22 दिसम्बर 2017 .......................
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित सामाजिक संगठन येश्वर्याज की संस्थापिका और आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा ने आज उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त,रजिस्ट्रार,सचिव और उपसचिव को अलग-अलग  पत्र भेजकर यूपी सूचना आयोग  में हर साल केन्द्रीय सूचना आयोग ( CIC ) की तर्ज पर वार्षिक सम्मलेन बुलाने की मांग की है और इस सम्बन्ध में एक प्रस्ताव आयोग को दिया है l

उर्वशी ने बताया कि येश्वर्याजलखनऊ स्थित एक अपंजीकृत सामाजिक संगठन है जो विगत 17  वर्षों से अनेकों सामाजिक क्षेत्रों के साथ-साथ 'लोकजीवन में पारदर्शिता संवर्धन और जबाबदेही निर्धारण' के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत है l

उर्वशी ने बताया कि साल 2005 में लागू हुआ सूचना का अधिकार कानून यानि कि आरटीआई एक्ट देश के सबसे क्रांतिकारी कानूनों में एक है। इस कानून ने सरकारी सूचनाओं तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित की है । कई घोटालों का खुलासा भी आरटीआई से मिली जानकारियों से हुआ है । उत्तर प्रदेश में सूचना का अधिकार अधिनियम  2005 का क्रियान्वयन कराने में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग की भूमिका सर्वोपरि है l ऐसे में यह आवश्यक है कि यूपी का सूचना आयोग भी केन्द्रीय सूचना आयोग द्वारा आयोजित किये जाने वाले वार्षिक अधिवेशन की तर्ज पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग का वार्षिक अधिवेशन आयोजित करे ताकि सूबे में  सूचना के अधिकार के सभी स्टेकहोल्डर्स को भी एक प्लेटफार्म पर आकर पिछले एक साल में पारदर्शिता और जबाबदेही के लिए किये गए अपने-अपने प्रयासों को आपस में साझा करने का और आपस में विचार-विनिमय करके अपने अपने क्षेत्र में सुधार करने का मौका मिल सके l 

उर्वशी ने बताया कि संस्था के प्रबंधकीय सदस्य की हैसियत से उन्होंने आज उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त,रजिस्ट्रार,सचिव और उपसचिव को अलग-अलग  पत्र भेजकर यूपी सूचना आयोग  में हर साल केन्द्रीय सूचना आयोग की तर्ज पर वार्षिक सम्मलेन बुलाने की मांग की है और इस सम्बन्ध में एक प्रस्ताव आयोग को दिया है l मुद्दे को व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ बताते हुए उर्वशी ने आयोग के पदाधिकारियों से प्रकरण में व्यक्तिगत ध्यानाकर्षण और समर्थन की अपेक्षा की बात कहते हुए आयोग स्तर से उनके प्रस्ताव पर गंभीरतापूर्वक विचार करके  निर्नल लेने की बात कही है l


बकौल उर्वशी उनको उम्मीद है कि उनकी मेहनत रंग लायेगी और अगले वर्ष यूपी का राज्य सूचना आयोग भी अपना वार्षिक सम्मलेन अवश्य बुलाएगा l 

Sunday, 17 December 2017

15 साल की RTI गर्ल ऐश्वर्या पाराशर की बड़ी कामयाबी : राष्ट्रीय खेल पर सामान्य ज्ञान बदलेगी सरकार l





लखनऊ/17 दिसम्बर 2017............
समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj


कहावत है कि अगर हौसले बुलंद हों तो असंभव कुछ भी नहीं है  और इस कहाबत को सच कर दिखाया है यूपी की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित और गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज सिटी मोंटेसरी स्कूल की राजाजीपुरम शाखा की कक्षा 11 की जीव विज्ञान की 15 वर्षीय छात्रा और देश भर में आरटीआई गर्ल के नाम से विख्यात ऐश्वर्या पराशर ने जो 15 साल की छोटी से उस उम्र में, जिसमें ज्यादातर बच्चे अपने खाली समय में खयाली पुलाव पकाने और खेलकूद करने में ही लगे रहते है, राष्ट्रीय खेल के सम्बन्ध में सामान्य ज्ञान में सदियों से चली आ रही त्रुटि में संशोधन करने के लिए अपने खुद के प्रयास से भारत सरकार को बाध्य कर दिया है l

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 बताते चलें कि ऐश्वर्या पराशर ही वह लडकी हैं जिन्होंने पांच साल पहले महज 10 साल की उम्र में ही अपनी आरटीआई  से यह चौंकाने वाला खुलासा किया था कि हॉकी देश का राष्ट्रीय खेल नहीं है l इस खुलासे के बाद ऐश्वर्या रुकी नहीं और पिछले पांच सालों से लगातार भारत सरकार को विभिन्न स्तरों पर पत्र  लिखकर पाठ्य पुस्तकों में भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी बताने वाली सामग्री को हटाकर इस सम्बन्ध में चली आ रही सदियों पुरानी भ्रांति को दूर कराकर सामान्य ज्ञान में संशोधन कराने के लिए लगातार प्रयास करती रहीं l आखिरकार ऐश्वर्या की 5 साल की मेहनत रंग लाई है l

इस महीने की बीती 11 तारीख को भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के खेल विभाग के अंतर्गत आने वाले खेल समन्वय विभाग के अवर सचिव ( एसपी. सीडीएन ) राज के गुप्ता ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग के अवर सचिव ( समन्वय ) महेश कुमार मीना को एक कार्यालय ज्ञापन जारी करके मानव संसाधन विकास मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन दिनांकित 18.08.17 और ऐश्वर्या द्वारा राष्ट्रीय खेल के सम्बन्ध में चली आ रही भ्रान्ति को दूर करने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को आदेश जारी कर सामान्य ज्ञान की पुस्तकों में त्रुटि सुधार की मांग का जिक्र करते हुए स्थिति स्पस्ट कर दी है l

गुप्ता ने मीना को बताया है कि भारत सरकार ने किसी भी खेल को देश के राष्ट्रीय खेल के रूप में घोषित नहीं किया है क्योंकि सरकार का उद्देश्य सभी लोकप्रिय खेलों विषयों को प्रोत्साहित /बढ़ावा देना है l

गुप्ता ने कार्यालय ज्ञापन की प्रति ऐश्वर्या को भी भेजी है l सामान्य ज्ञान त्रुटि संशोधन के अपने प्रयास को सफलता के रास्ते पर चलते-चलते मंजिल के पास तक पहुँच जाने से खुश ऐश्वर्या ने एक एक्सक्लूसिव बातचीत में इस स्वतंत्र पत्रकार को बताया है कि उनको संतोष है कि कुछ दिनों बाद देश राष्ट्रीय खेल के सबाल पर गलत जबाब नहीं देगा l ऐश्वर्या ने मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखकर इस सम्बन्ध में जल्द से जल्द आदेश जारी कराने की  बात भी इस स्वतंत्र पत्रकार को बताई है l
      
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News written by freelance journalist Urvashi Sharma  
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj


Thursday, 14 December 2017

मनमोहन काल के मुकाबले मोदी काल में दोगुनी दर से शहीद हो रहे वायु सैनिक! : साल २०१७ के १० महीने में ही शहीद हो गए पिछले ९ सालों के बराबर वायुसैनिक ! लखनऊ के फायरब्रांड एक्टिविस्ट संजय शर्मा की आरटीआई ने किया चौंकाने वाला खुलासा l





लखनऊ/१४ दिसम्बर २०१७............
समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

किसी भी युद्ध में वायुसेना की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है और वायु सेना की रीढ़ की हड्डी होते हैं वायु सैनिक और इसीलिये एक-एक वायु सैनिक का जीवन अनमोल होता है पर क्या आप जानते हैं कि इस साल हमारे देश भारत की वायु सेना ने कितने अनमोल वायु सैनिक गवां दिए हैं? नहीं न l तो चलिए अब हम आपको इसकी सटीक जानकारी दिए देते हैं क्योंकि आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के फायरब्रांड आरटीआई एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा द्वारा दायर की गई एक आरटीआई पर भारत के वायु सेना मुख्यालय ने संजय को जो जानकारी दी है उससे यह चौंकाने वाला खुलासा हो गया है कि चालू साल २०१७ के शुरुआती १० महीने में ही पिछले ९ सालों के बराबर यानि कि १ जनवरी २००८ से ३१ दिसम्बर २०१६ तक के समय में शहीद हुए वायुसैनिकों के बराबर वायुसैनिक शहीद हो गए हैं l



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देश में पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में काम रहे चोटी के समाजसेवियों में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते सितम्बर महीने की ०४  तारीख को भारत के रक्षा मंत्रालय में एक आरटीआई अर्जी भेजी थी l नई दिल्ली स्थित भारत के वायु सेना मुख्यालय की विंग कमांडर और केन्द्रीय जन सूचना अधिकारी सुमन अधिकारी ने संजय को जो सूचना दी है उसके अनुसार देश ने साल २००७ में २, साल २००८ में १,साल २०१३ में ५,साल २०१६ में १ और चालू साल २०१७ के शुरुआती १० महीनों में ७ वायुसैनिक गवां दिए हैं l



देश भर में अपने तेजतर्रार रुख के लिए जाने जाने वाले समाजसेवी संजय शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार को एक विशेष बातचीत में बताया कि उनको दी गई सूचना से स्पष्ट है कि साल २००७ से २०१३ तक के पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अंतिम ७ सालों  में ८ वायुसैनिक शहीद हुए थे जबकि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरंभिक साढ़े तीन साल में ही ८ वायुसैनिक शहीद हो गए हैं l इस आधार पर संजय का कहना है कि अगर दोनों प्रधानमंत्रियों के कार्यकालों की तुलना करें तो वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश के वायुसैनिकों के शहीद होने की दर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के कार्यकाल की दर से दोगुनी हो गई है l  

वायुसैनिकों के शहीद होने की घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए संजय ने इन घटनाओं को देश की अपूर्णनीय क्षति बताया और देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर वायुसैनिकों के शहीद होने की दर के दोगुना होने के कारणों की खोज करने के लिए जांच कराने और आवश्यक कदम उठाकर अनमोल वायुसैनिकों के शहीद होने की दर को कम करने के आवश्यक उपाय करने की मांग उठाने की बात भी इस स्वतंत्र पत्रकार से कही है l    
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News written by freelance journalist Urvashi Sharma  
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

Wednesday, 13 December 2017

UP गृह विभाग में गुम गई भारत सरकार की एडवाइजरी लेकिन RTI एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने प्रयास कर जारी कराया शासनादेश l


लखनऊ/१३ दिसम्बर २०१७............
समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj

साल २००५ में लागू हुआ आरटीआई एक्ट जहाँ एक तरफ बड़े-बड़े घोटाले उजागर कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ देश के समाजसेवी इस अधिनियम का प्रयोग करके सरकारों से आम जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर वृहद् लोकहित के शासनादेश तक जारी कराने में कामयाबी हासिल  कर रहे हैं l   इसी कड़ी में ताजा खबर आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से आ रही है जहाँ के फायरब्रांड आरटीआई एक्टिविस्ट और इंजीनियर संजय शर्मा ने आरटीआई एक्ट का प्रयोग करके  उत्तर प्रदेश सरकार से सभी नागरिकों के लिए बिना किसी भेद-भाव के भयमुक्त वातावरण में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने का शासनादेश जारी कराने में कामयाबी हासिल की है l


Download original RTI & other related documents by clicking this exclusive weblink http://upcpri.blogspot.in/2017/12/l_13.html

देश में पारदर्शिता, जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में काम रहे चोटी के समाजसेवियों में शुमार होने वाले संजय शर्मा ने बीते मार्च महीने की १६ तारीख को यूपी के मुख्य सचिव के कार्यालय के जनसूचना अधिकारी और अनुसचिव पी. के. पाण्डेय को एक आरटीआई अर्जी भेजकर भारत सरकार द्वारा सभी पुलिस थानों पर संज्ञेय अपराधों की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की वाध्यता होने और ऍफ़.आई.आर. दर्ज नहीं करने पर सम्बंधित थाना प्रभारी के खिलाफ विधिक कार्यवाही करने के सम्बन्ध में साल २०१५ के अक्टूबर महीने की १२ तारीख को यूपी के मुख्य सचिव को जारी की गई एक एडवाइजरी पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्यवाही आदि से सम्बंधित ६ बिन्दुओं पर सूचना माँगी थी l बीते २१ मार्च को पाण्डेय ने संजय को चिट्ठी भेजकर बताया कि मुख्य सचिव कार्यालय ने भारत सरकार की एडवाइजरी को साल २०१५ के अक्टूबर महीने की १६ तारिख को ही यूपी के गृह विभाग को भेज दिया था और संजय की आरटीआई की अर्जी को एक्ट की धारा ६(३) के तहत गृह विभाग के जन सूचना अधिकारी को अंतरित कर दिया था l ३० दिन में सूचना न  मिलने पर संजय ने बीते २७ अप्रैल को मामला राज्य सूचना आयोग में दाखिल कर दिया था l


उत्तर प्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी के दखल के बाद गृह (पुलिस) अनुभाग-३ के अनुभाग अधिकारी और जन सूचना अधिकारी उदय प्रताप सिंह ने संजय को जो सूचना दी है वह जहाँ एक तरफ महत्वपूर्ण सरकारी अभिलेखों के रखरखाव के  प्रति यूपी के गृह विभाग की घोर लापरवाही को उजागर कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ सूचना के अधिकार की ताकत को भी उजागर कर रही है l सिंह ने एक्टिविस्ट संजय को बताया है कि मुख्य सचिव द्वारा भेजी गई भारत सरकार की एडवाइजरी गृह विभाग में प्राप्त नहीं हो पाने के कारण इस एडवाइजरी पर कोई निर्देश जारी नहीं हो पाए थे l सिंह ने संजय को यह भी बताया है कि मार्च महीने में उनके द्वारा आरटीआई के साथ भेजी गई भारत सरकार की एडवाइजरी और इसके संलग्नकों का संज्ञान लेकर प्रदेश सरकार ने बीते जून महीने की १९ तारीख को शासनादेश जारी करके यूपी के पुलिस महानिदेशक,समस्त जोनल अपर पुलिस महानिदेशक,समस्त परिक्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक,समस्त पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को सीआरपीसी की धारा १५४ के अंतर्गत संज्ञेय अपराधों में अनिवार्य रूप से सभी नागरिकों के लिए बिना किसी भेद-भाव के भयमुक्त वातावरण में प्रथम सूचना रिपोर्ट ( FIR ) दर्ज कराने के निर्देश जारी किये गए हैं l संजय को प्रमुख सचिव अरविन्द कुमार द्वारा जारी किये गए इस शासनादेश की प्रति भी दी गई है l यह शासनादेश उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक अपराध,अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था,समस्त मंडलायुक्त और समस्त जिला मजिस्ट्रेटों को पृष्ठांकित भी  है l

अपनी आरटीआई की सफलता से खुश संजय ने इस स्वतंत्र पत्रकार को एक विशेष बातचीत में बताया कि अब वे पूरे सूबे के सभी थानों में इस शासनादेश का अक्षरशः अनुपालन कराने और अनुपालन नहीं करने वाले थानाध्यक्षों को दण्डित कराने की मुहिम शुरू करने जा रहे हैं l संजय ने इस मामले में थानों से बिना ऍफ़.आई.आर. दर्ज किये टरकाये गए पीड़ितों द्वारा  मोबाइल हेल्पलाइन नंबर ८०८१८९८०८१  पर बात करने पर  व्यक्तिगत रूप से मदद करने की बात भी कही है l   
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समाचार लेखिका - उर्वशी शर्मा  ( स्वतंत्र पत्रकार )
Exclusive News by YAISHWARYAJ ©yaishwaryaj


Sunday, 10 December 2017

10 सालों में भारतीय सेना के 14415 जवान शहीद : आरटीआई खुलासा l

14415 Indian Army soldiers martyred in 10 years : RTI

लखनऊ/10 दिसम्बर 2017

News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News *Exclusive ©yaishwaryaj


यूपी की राजधानी लखनऊ निवासी  देश के जानेमाने आरटीआई एक्सपर्ट और इंजीनियर संजय शर्मा की एक आरटीआई अर्जी पर जवाब देते हुए भारतीय सेना ने बताया है  कि साल 2008 से लेकर इस साल बीते 01 नवम्बर तक बैटल कैजुअलटी में 1228 और फिजिकल कैजुअलटी में 13187 जवान शहीद हो चुके हैं। इस तरह पिछले 10 सालों में 14415 जवान देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर चुके हैं l  बीते सितंबर महीने में  संजय शर्मा द्वारा रक्षा मंत्रालय को भेजी गई आरटीआई एप्लीकेशन पर एकीकृत मुख्यालय  रक्षा मंत्रालय ( सेना ) के लेफ्टिनेंट कर्नल और जन सूचना अधिकारी ए. डी. एस. जसरोटिया ने बीते 13 नवम्बर के पत्र के माध्यम से यह जानकारी सार्वजनिक की है।


अपने प्राणों की परवाह न करते हुए देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ देश को अंदरूनी अंतर्द्वंदों से निजात दिलाने वाले सैनिकों को ही रियल हीरो मानने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने यह आरटीआई अर्जी देकर पिछले 10 सालों में सेना के अंगवार यानि कि थल सेना, जल सेना और वायु सेना के ऑन ड्यूटी शहीद हुए सैनिकों की वर्षवार सूचना माँगी थी l  थल सेना ने संजय को सूचना दे दी है जबकि जल सेना और वायु सेना से सूचना मिलना अभी शेष है l



आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि पिछले 10 सालों में बैटल कैजुअलटी में किसी 1 साल में सबसे ज्यादा 311 जवान साल 2008 में शहीद हुए और सबसे कम 74 जवान साल 2013 में शहीद हुए l इस साल अब तक 81 जवान बैटल कैजुअलटी में अपनी जान गवां चुके हैं l संजय को यह भी बताया गया है कि 10 सालों में फिजिकल कैजुअलटी में किसी एक साल में सबसे ज्यादा 1530 जवान साल 2010 में शहीद हुए और सबसे कम 1250 जवान साल 2015 में शहीद हुए l इस साल अब तक 876 जवान फिजिकल कैजुअलटी में अपनी जान गवां चुके हैं l इस तरह इस आरटीआई से यह खुलासा हुआ है कि पिछले 10 सालों में किसी 1 साल में सबसे ज्यादा 1720 जवान साल 2010 में  ऑन ड्यूटी शहीद हुए और सबसे कम 1359 जवान साल 2013 में ऑन ड्यूटी शहीद हुए l इस साल अब तक 957 जवान ऑन ड्यूटी अपनी जान गवां चुके हैं l



मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय काम करने वाले और पेशे से इंजीनियर संजय शर्मा ने इस स्वतंत्र पत्रकार को एक विशेष बातचीत में बताया कि इस प्रकार पिछले दस सालों में प्रतिवर्ष औसतन 123 जवान बैटल कैजुअलटी में , 1319 जवान फिजिकल कैजुअलटी में और इस प्रकार कुल 1442 जवान ऑन ड्यूटी  शहीद हो रहे हैं l संजय का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अगर साल 2016 को छोड़ दें तो साल 2012 से अब तक प्रतिवर्ष शहीद होने वाले कुल सैनिकों की संख्या पिछले 10 सालों  के औसत से कम रही है l संजय के अनुसार उन्होंने आरटीआई इसलिए दायर की थी क्योंकि वे देश को बताना चाहते थे कि  देश को सुरक्षित रखने और देश में अमन चैन कायम रखने के लिए आखिर हमें  कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है l 

संजय को दी गई वर्षवार सूचना पर एक नज़र ->

Year
Battle Casualty
Physical Casualty
Total
8
311
1323
1634
9
114
1464
1578
10
190
1530
1720
11
76
1423
1499
12
85
1350
1435
13
74
1285
1359
14
77
1307
1384
15
109
1250
1359
16
111
1379
1490
17
81
876
957
Total
1228
13187
14415


नई दिल्ली के विज्ञान भवन में बीते बुधवार हुए  केन्द्रीय सूचना आयोग के 12वें वार्षिक सम्मेलन में “मामले से लेना-देना रखने वाले लोगों को ही आरटीआई मांगने देने की  प्रणाली विकसित करने” की बात करने के केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के बयान की भर्त्सना करते हुए एक्टिविस्ट संजय ने कहा है कि मौका मिलने पर वे सिंह से इस सबाल का उत्तर जानना चाहेंगे कि यदि उनकी मनचाही हुई तो क्या इस आरटीआई जैसी जनहित की आरटीआई दायर हो पाएंगी और क्या तब सैनिकों की शौर्यगाथा के ऐसे खुलासे हो पाएंगे ?



संजय ने बताया है कि वे देश के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग करेंगे कि सैनिकों की साहसिक अमर गाथा की यह जानकारी सैनिकों के नाम के साथ नियमित समय अंतराल पर जनता को सार्वजनिक तौर पर दी जाए  

Find original RTI & its reply at exclusive weblink http://upcpri.blogspot.in/2017/12/1442-10-14415-rti-l.html


News Author - Urvashi Sharma ( Freelance Journalist )

YAISHWARYAJ News *Exclusive ©yaishwaryaj